"हमें पता है कि गठबंधन में बने रहना ही बेहतर है और यही राज्य के भी हित में है। जो हम चाहते हैं, वह यह कि हमें सम्मान दिया जाए। हमें इसे ठंडे दिमाग से करना होगा।"
लोकसभा चुनावों के नतीजे आने पर जब मोदी सरकार 2.0 की एनडीए कैबिनेट बनाने की कवायद शुरू हुई, तो जदयू ने सरकार में शामिल होने से इंकार कर दिया था। तब केसी त्यागी ने ही इसे 'अंतिम निर्णय' बताया था लेकिन आगामी बिहार विधान सभा चुनाव को देखते हुए...
"टीपू सुल्तान ने हजारों ईसाईयों व कोडवा समुदाय के लोगों को जबरन इस्लाम कबूल करवाया था। उसने अपने शासनकाल के दौरान फ़ारसी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया था। वो कोई स्वतंत्रता सेनानी भी नहीं है।"
बीजेपी अल्पमत की सरकार बना सकती है, जैसा उसने 2014 के विधानसभा चुनावों के बाद किया था। पिछले दिनों जिस तरह कर्नाटक और गोवा में कॉन्ग्रेस विधायक दल में टूट हुई थी, वैसा ही कुछ महाराष्ट्र में होने के भी कयास लगाए जा रहे हैं।
दिल्ली के होटल लीला में थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर मृत मिली थीं। थरूर के खिलाफ़ आईपीसी की धारा 498-A और धारा -306 के तहत मामला दर्ज है। फिलहाल वह जमानत पर हैं। दिल्ली पुलिस ने अदालत से उनके खिलाफ हत्या का मामला चलाने की इजाजत मॉंगी है।
भाजपा केवल शिवसेना के भरोसे बैठे नहीं रहना चाहती। बताया जा रहा है कि 15 निर्दलीय और कई छोटी पार्टियॉं उसके साथ आने को तैयार हैं। निर्दलीयों में ज्यादातर ऐसे हैं जिन्होंने टिकट नहीं मिलने पर बीजेपी से ही बगावत की थी।
यूॅं ही नहीं कहते बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना। 44 सीटें जीत चौथे पायदान पर रही कॉन्ग्रेस भी शिव सेना के साथ मिल सरकार बनाने के ख्वाब बुन रही है। जबकि 54 सीटें जीतने वाली उसकी साझेदार एनसीपी बार-बार कह रही कि हम विपक्ष में बैठेंगे।
समीकरण कि अगर भाजपा को सत्ता से बाहर रखना ही ध्येय है तो शिव सेना के 56, कॉन्ग्रेस के 44 और एनसीपी के 54 की सरकार आराम से बहुमत के लिए ज़रूरी 145 विधायकों के सामने 154 खड़े कर सकती थी। लेकिन.....