कर्नाटक में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान को लेकर भ्रम और डर फैलाने की कोशिश की जा रही है। इसी क्रम में अभिनेता प्रकाश राज ने 11 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर दावा किया कि बेंगलुरु की वोटर लिस्ट से उनका नाम जानबूझकर हटा दिया गया है। खुद को ’65 लाख हटाए गए मतदाताओं’ में से एक बताते हुए उन्होंने इशारों-इशारों में केंद्र सरकार पर राजनीतिक द्वेष के तहत मताधिकार छीनने का आरोप लगाया।
95 सेकंड के वीडियो में प्रकाश राज ने कहा:
“प्यारे दोस्तों, साथियों, मैं आपके साथ एक चुटकुला शेयर करना चाहता हूँ। मैं उन 65 लाख मतदाताओं में से एक हूँ जिनका वोटिंग राइट SIR के बाद बेंगलुरु निर्वाचन क्षेत्र से डिलीट कर दिया गया है। अच्छा मजाक है ना? मैं इसी निर्वाचन क्षेत्र में पैदा हुआ, यहीं पढ़ा-लिखा, थिएटर किया और आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि मैं यहाँ से सांसद का उम्मीदवार भी रहा हूँ।”
प्रकाश राज ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि सत्ता का इस्तेमाल कर मतदाताओं के अधिकार छीने जा रहे हैं। उसने आगे कहा,
“अच्छा, मजाक अच्छा है। गेम ऑन। अब देखता हूँ कि मुझे किस प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। अपना वोटर आईडी वापस पाने के लिए क्या-क्या कागज दिखाना पड़ेगा? खैर, गेम ऑन। लेकिन एक छोटी सी बात मेरे दोस्त- आप उन कुछ नागरिकों के वोट देने के अधिकार को छीनने के लिए अपनी ताकतों का इस्तेमाल कर सकते हैं जो शायद आपको न चुनें। लेकिन मेरे प्यारे दोस्त, क्या आप हमें सत्ता से नीचे गिराने की हमारी ताकत से रोक सकते हैं? बस पूछ रहा हूँ। बाय।”
इस वीडियो के कैप्शन में प्रकाश राज ने लिखा “फ्रैंड, तुम उन कुछ नागरिकों से वोट देने का अधिकार छीनने का रास्ता चुन सकते हो जो शायद तुम्हें दोबारा तख्त पर न बिठाएँ… लेकिन क्या तुम आखिरकार तुम्हें तख्त से नीचे गिराने की हमारी ताकत से हमें रोक सकते हो? #JustAsking”
Fraand 😂😂 you may chose n deny voting rights of few citizens who may not elect you back to thrown.. but can you stop us from eventually bringing you down from your thrown #justasking pic.twitter.com/S8BpM3CNy0
— Prakash Raj (@prakashraaj) August 11, 2026
चुनाव आयोग और BBMP ने खोली पोल
अपने पोस्ट के जरिए प्रकाश राज ने जमकर प्रोपगेंडा फैलाने का प्रयास किया वहीं बेंगलुरु नागरिक निकाय और अतिरिक्त जिला चुनाव अधिकारी के आधिकारिक बयान ने प्रकाश राज के इन आरोपों की हवा निकाल दी है।
बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉर्पोरेशन के अपर जिला निर्वाचन अधिकारी (और आयुक्त) जगदीश जी ने जबरन मताधिकार छीने जाने के प्रकाश राज के दावों का खंडन करते हुए एक जवाब जारी किया और बताया कि 16 जून 2026 तक, जब SIR के लिए चुनावी डेटा फ्रीज किया गया था, तब प्रकाश राज का नाम 163-शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रूप से पंजीकृत था। अधिकारी ने विशिष्ट विवरण देते हुए कहा कि उनका नाम मतदाता सूची में भाग संख्या 1 (Part No. 1) के क्रम संख्या 970 (Serial No. 970) पर पंजीकृत था।
इसके अलावा, पंजीकृत पते (नंबर 266, गार्डन अपार्टमेंट, विथल माल्या रोड) पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा घर-घर जाकर किए गए सत्यापन में यह बात सामने आई कि प्रकाश राज वहाँ से स्थायी रूप से स्थानांतरित (Shift) हो चुके थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु सेंट्रल से असफल चुनाव लड़ने वाले यह राजनेता पिछले लगभग चार वर्षों से इस जाँच किए गए पते पर नहीं रह रहे थे।
जगदीश जी ने एक बयान में कहा, “संबंधित पार्टी के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा किए गए घर-घर सत्यापन के दौरान, यह पाया गया कि श्री प्रकाश राज पंजीकृत पते ‘नंबर 266, गार्डन अपार्टमेंट’ से स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं।”
इन तथ्यों की पुष्टि संपत्ति प्रबंधक (प्रॉपर्टी मैनेजर), पड़ोसियों और वहाँ रह रहे फ्लैट मालिक ने की। सत्यापन के बाद एक पंचनामा या स्थल निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की गई।
चूँकि प्रकाश राज स्थायी रूप से कहीं और स्थानांतरित हो गए थे, इसलिए चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार उनका स्टेटस “Shifted” (स्थानांतरित) के रूप में दर्ज किया गया। इस प्रकार, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने प्रकाश राज का नाम मतदाता सूची से मनमाने ढंग से या किसी राजनीतिक पूर्वाग्रह के कारण नहीं हटाया।
🚨 FACT CHECK: Prakash Raj’s Voter-Deletion Claim Falls Flat!
— BJP Karnataka (@BJP4Karnataka) August 11, 2026
Actor Prakash Raj alleged that his name was deleted from the electoral roll during the SIR exercise.
But the official clarification from Bengaluru Central City Corporation tells a different story.
✅ His name was on… https://t.co/TKXdCnqU6T pic.twitter.com/IxeSaL9FWr
फोन पर बातचीत और फॉर्म 6 भरने का सुझाव
चुनाव अधिकारियों ने प्रकाश राज से फोन पर बातचीत भी की, जिसमें उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि वे अब उस पुराने पते पर नहीं रहते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया में किसी का नाम मनमाने ढंग से नहीं काटा जाता, बल्कि अनुपस्थित या स्थानांतरित मतदाताओं को नियमानुसार चिन्हित किया जाता है।
प्रकाश राज अपने नए पते के लिए फॉर्म 6 जमा करके अपना मतदाता पहचान पत्र आसानी से अपडेट करा सकते हैं। आयोग के इस जवाब ने साबित कर दिया कि उनका सोशल मीडिया पर किया गया दावा तथ्यात्मक रूप से गलत था।
चार वोटर आईडी कार्ड और अदालती वारंट का मामला
इस पूरे विवाद के बीच प्रकाश राज का स्वयं का ट्रैक रिकॉर्ड भी सवालों के घेरे में है। उन पर कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना में चार अलग-अलग वोटर आईडी कार्ड रखने के आरोप हैं, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन है।
बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद अदालत में पेश न होने के कारण बेंगलुरु की एक अदालत उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी कर चुकी है। नियम-कायदों का पालन करने के बजाय चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना केवल इस प्रशासनिक प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देने का प्रयास प्रतीत होता है।


