‘अखिलेश यादव को समझ आ गया होगा कि पश्चिमी यूपी में ‘चौधरी’ कौन… पड़ेंगे एक-एक सीट के लाले’: सपा प्रमुख की सभाएँ रद्द, रालोद ने समझाई ‘राजनीति’

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान ने जो सियासी बवाल खड़ा किया था, वो अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गलियों तक पहुँच चुका है। राष्ट्रीय लोक दल ने अखिलेश के प्रस्तावित बुलंदशहर दौरे के टलने पर सीधा निशाना साधा है।

पार्टी का कहना है कि पश्चिमी यूपी में 36 बिरादरी की नाराजगी अब असर दिखाने लगी है। पहले सहारनपुर की सभा टली, अब बुलंदशहर की भी और रालोद इसे महज संयोग मानने को तैयार नहीं। पार्टी प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने एक वीडियो जारी करके अखिलेश यादव पर हमला बोला।

तंज भरे लहजे में उन्होंने कहा कि अब शायद अखिलेश को समझ आ गया होगा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ‘चौधरी’ किसे कहते हैं। उनका आरोप था कि अखिलेश ने उसी चौधरी परिवार को अपमानित करने की कोशिश की, जिसने कभी उनके परिवार को राजनीति सिखाई थी।

विवाद की जड़ में गया वही पुराना बयान

पूरा मामला शुरू हुआ था 17 अगस्त को दिए अखिलेश यादव के एक बयान से, जिसमें उन्होंने बिना नाम लिए रालोद प्रमुख जयंत चौधरी पर तंज कसा था। लखनऊ के एक कार्यक्रम में अखिलेश ने कहा था कि गठबंधन में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हुए थे, जिन्हें उन्होंने ‘चवन्नी से रुपया‘ बना दिया, बावजूद इसके वे साथ छोड़ गए।

इस बयान को सीधे-सीधे जयंत चौधरी और उनके परिवार पर कटाक्ष माना गया और यहीं से रालोद खेमे की तरफ से पलटवार का सिलसिला शुरू हो गया। बात यहीं नहीं थमी। सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने भी मुजफ्फरनगर में जाकर कह दिया कि समाजवादी पार्टी ने ही ‘चवन्नी को रुपया’ बनाया है, जिन्हें राजनीति की ABCD तक नहीं आती थी, उन्हें सपा ने मंच दिया और आगे बढ़ाया।

अब रालोद इसी बयान को हथियार बनाकर अखिलेश और सपा को घेर रही है। पार्टी का तर्क है कि अगर सपा ने वाकई किसी को राजनीति सिखाई थी, तो अब पश्चिमी यूपी की जमीन पर उस ‘सिखाने’ का जवाब भी मिल रहा है।

‘AC में बैठकर वोट नहीं मिलते’

बुलंदशहर दौरा रद्द होने पर रोहित अग्रवाल का गुस्सा साफ झलका। उन्होंने कहा कि AC वाले कमरों में बैठकर बड़ी-बड़ी बातें कर लेना आसान होता है लेकिन चुनाव आते ही जनता के बीच जाकर ही वोट माँगना पड़ता है।

उनका दावा था कि पश्चिमी यूपी का किसान अपने मान-सम्मान पर आँच आने पर लट्ठ उठाने से भी नहीं हिचकेगा। समाज को बाँटने की राजनीति को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता इसका करारा जवाब देगी।

अग्रवाल ने यह भी जोड़ा कि ऑडिटोरियम में बैठकर चुनाव नहीं जीते जाते, वोट माँगने के लिए जमीन पर उतरना ही होगा। उनके मुताबिक जाट समाज और चौधरी परिवार के अपमान का हिसाब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता चुनाव में जरूर चुकता करेगी।

‘सपा एक-एक सीट के लिए तरसेगी’

2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर रोहित अग्रवाल ने एक और बड़ा दावा ठोका कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को एक-एक सीट के लाले पड़ जाएँगे और उसका खाता तक नहीं खुलेगा।

बेशक, रालोद के इन दावों को फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा कुछ नहीं माना जा सकता। चुनाव में अभी वक्त है, और सीटों पर इसका असली असर तो नतीजे आने के बाद ही पता चलेगा।

पर इतना तय है कि अखिलेश यादव का ‘चवन्नी से रुपया’ वाला जुमला अब सपा के लिए पश्चिमी यूपी में गले की फाँस बन चुका है। जिस ‘ABCD’ को लेकर अखिलेश ने कभी अपने पुराने सहयोगी पर तंज कसा था, आज वही शब्द रालोद के हाथ का हथियार बनकर उन्हीं पर वार कर रहा है।