विषय: Health

केजरीवाल पर कपिल मिश्रा के आरोप, खुद क्यों जाते हैं निजी अस्पताल में इलाज कराने

केजरीवाल उनके मंत्रियों का लाखों का इलाज बाहर से और जनता जाए मोहल्ला क्लीनिक: कपिल मिश्रा

"अकेले केजरीवाल और उनके परिवार ने दिल्ली के बाहर इलाज करवाने में अब तक 13 लाख रूपए खर्च कर डाले। यही हाल मनीष सिसोदिया का भी है। सतेन्द्र जैन के परिवार को दिल्ली सरकार के खर्चे पर दिल्ली से बाहर भेजा जाता है। पिछले पाँच साल में दिल्ली के मंत्रियों और उनके परिवारों पर तकरीबन 50 लाख रूपए की मोटी रकम खर्च की गई।"
डॉक्टर निशाने पर क्यों?

सड़े हुए सिस्टम से लड़ो नामर्दों, 73 साल के डॉ. देबेन दत्ता की मॉब लिंचिंग से खाक मिलेगा

अस्पतालों, डॉक्टरों, उपकरणों और अन्य संसाधनों की घोर कमी का संकट दोतरफा है। फिर क्यों 75 फीसदी डॉक्टर जुबानी और 12 फीसदी शारीरिक हिंसा के शिकार? सरकारों की नाकामी का खीझ उन पर क्यों? इस गुस्से को सिस्टम से सवाल करने के लिए बचाकर रखिए।
मेडिकल कॉलेज

बिहार: अब गया में पसरा चमकी बुखार का खौफ, 6 बच्चों की मौत

बिहार में चमकी बुख़ार से अब तक 180 बच्चों की मौत हो चुकी है। इसका सबसे ज्यादा असर मुजफ्फरपुर में देखने को मिला है, जहाँ AES के कारण 145 बच्चों की जान गई है।
TikTok वीडियो

नर्सों ने नवजात संग नाचते गाते बनाया TikTok वीडियो, अस्पताल ने की कार्रवाई

चारों नर्सों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। मुख्य ज़िला चिकित्सा अधिकारी (सीडीएमओ) अजीत मोहंती की सिफ़ारिश पर ज़िलाधिकारी मनीष अग्रवाल ने चारों नर्सों को छुट्टी पर भेजने का निर्देश दिया।
भारत और मौतों की संख्या

मौत तो केवल आँकड़ा है: क्या एक बुरी घटना के कारण सारे अच्छे कार्यों को रोक दिया जाए?

मेरे देश में मौत महज एक आँकड़ा है, गणित है, अंक है। आइए, आपको गिनाता हूँ। मुजफ्फरपुर में भी मौतें हुईं। जहाँ बात निदान की होनी चाहिए, वहाँ सिर्फ़ एक व्यक्ति को ज़िम्मेदार ठहरा कर कोई निकल नहीं सकता। क्या एक बुरी घटना के लिए अच्छी चीजों पर भी विराम लगा दिया जाए?
लोगों का एक समूह है जो महसूस करने से ज्यादा सोशल मीडिया पर महसूस करते दिखना चाहता है

असली गिद्ध कौन है? आपकी संवेदना बस एक नकली ब्यूटी फ़िल्टर है, और कुछ नहीं

वाक्य के आधे हिस्से में संवेदना दिखाते हुए, दूसरे हिस्से में जो आप सिनिकल हो जाते हैं उससे पता चलता है कि आपको बच्चों की मौत से कोई मतलब नहीं। आपको मुद्दा चाहिए ताकि आप आउटरेज करते हैं। आप चौबीस घंटे इसी मोड में रहते हैं, जैसे कि सत्ता के पक्ष में लिखने वाला चौबीस घंटे उसके बचाव में लगा रहता है।
सुशील मोदी, इंसेफेलाइटिस

अपने निकम्मेपन को छिपाने के लिए राबड़ी को बिहार का नेहरू बना रहे हैं सुशील मोदी

स्थापना के 49 वर्ष बीत जाने के बवजूद SKMCH में Pediatrics (बाल्चिकित्सा) का पोस्ट ग्रेजुएट कोर्ट क्यों नहीं है? अपनी नाकामी छिपाने के लिए राबड़ी देवी को बिहार का नेहरू बनाने वाले सुशील मोदी को समझना चाहिए कि सीटों की संख्या के साथ ज़िम्मेदारियों का बोझ भी बढ़ता है।
नितीश कुमार

अप्रिय नितीश कुमार, बच्चों का रक्त अपने चेहरे पर मल कर 103 दिन तक घूमिए

हॉस्पिटल का नाम, बीमारी का नाम, जगह का नाम, किसकी गलती है आदि बेकार की बातें हैं, क्योंकि सौ से ज़्यादा बच्चे मर चुके हैं। इतने बच्चे मर कैसे जाते हैं? क्योंकि भारत में जान की क़ीमत नहीं है। हमने कभी किसी सरकारी कर्मचारी या नेता को इन कारणों से हत्या का मुकदमा झेलते नहीं देखा।
बिहार- गर्मी से मौत

बिहार में भीषण गर्मी के कारण 200 मौतें, धारा 144 लागू, अस्पतालों में मचा कोहराम

11 बजे से 4 बजे तक दिन में सभी निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है। सरकारी मनरेगा योजनाएँ व उनके तहत होने वाले कामकाज भी सुबह 10.30 के बाद ठप्प रहेंगे। खुले स्थानों पर किसी भी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने पर भी प्रशासन ने निषेध लगा दिया है।
इंसेफेलाइटिस से मौतें

योगी से सीख सकते हैं नीतीश कुमार: गोरखपुर में AES से हुई मौतों को इस तरह किया नियंत्रित

जापानी इंसेफेलाइटिस के कारण हुई मौतों में एक वर्ष के भीतर दो तिहाई की कमी आई। जहाँ 2017 में इस बीमारी से 557 जानें गई थीं, 2018 में यह आँकड़ा 187 रहा। इस वर्ष फ़रवरी में जापानी इंसेफेलाइटिस की वजह से 1 भी बच्चे की जान जाने की बात सामने नहीं आई है।
बिहार AES, Heatwave

AES से 100+, गर्मी से 160+ मौतें: बिहार में इंसान की जान का कोई मोल नहीं, 450 अस्पताल में

उधर AES से हो रही मासूमों की मौतें थमने का नाम नहीं ले रही, इधर बिहार में गर्मी व लू का ऐसा प्रकोप चला है कि 161 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। दक्षिण-पूर्वी बिहार में गर्मी का प्रकोप भयंकर तरीके से बढ़ गया है और मरने वालों में अधिकार बुज़ुर्ग हैं।
मुजफ्फरपुर बुख़ार, 84 मौतें

बिहार AES त्रासदी: धिक्कार है ऐसे निकम्मे नेताओं पर, जिनकी वजह से एक-एक कर मर रहे हैं मासूम

आज बिहार लाचार है। बिहार के ग़रीब परिवारों के सामने उनके बच्चों की जानें जा रही हैं और सरकारें हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं। आज बिहार के इन ग़रीबों की सुनने वाला कोई नहीं है। अस्पताल के अधिकारी भी इन्हें फटकार रहे हैं। 93 मौतों वाली भयंकर त्रासदी।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

114,514फैंसलाइक करें
23,114फॉलोवर्सफॉलो करें
121,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements