Monday, January 17, 2022

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Judiciary

मुँह में लिंग डालना, लड़की के कपड़े उतारना, अकेला आदमी नहीं कर सकता रेप… 2021 के वे 10 मौके जब ‘न्याय’ पर उठे सवाल

साल 2021 वो साल है, जिसमें लगातार न्यायपालिका अपने फैसलों और टिप्पणियों को लेकर चर्चा में रही। कई ऐसे फैसले आए जिन पर खासा विवाद हुआ।

आम आदमी के लिए तारीखों में उलझा न्याय, आतंकी-बलात्कारी-हत्यारे… के लिए आधी रात बैठी सुप्रीम कोर्ट: निर्भया केस की भी यही कहानी

आतंकी, बलात्कारी, हत्यारे की फाँसी रोकने के लिए ही नहीं, उद्योगपति को जमानत देने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट रात को खुली। CJI तक को जागना पड़ा।

मुख्य सचिव पर CHC की टिप्पणियाँ ममता और अफसरशाही पर चोट, इस पर ‘मीडिया गिरोह’ की चुप्पी में छिपी है गहरी साजिश

मुख्य सचिव के बारे में न्यायालय की इस टिप्पणी को मीडिया और विशलेषकों द्वारा जानबूझकर महत्वहीन बना देना शायद सेक्युलर रणनीति का अहम पहलू है।

ज्ञानवापी मस्जिद के ASI सर्वे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक: काशी विश्वनाथ मंदिर केस आया नया मोड़

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस प्रकाश पाडिया ने ज्ञानवापी मस्जिद के एएसआई सर्वेक्षण के फैसले को गलत ठहराया औऱ उस पर रोक लगा दी।

राम मंदिर पर फैसला सुनाने वाले SC के रिटायर जज के घर पर बम से हमला: प्रयागराज में क्राइम ब्रांच सहित पुलिस टीम ने...

अयोध्या श्रीराम मंदिर पर फैसला देने वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ के सदस्य रहे रिटायर जज अशोक भूषण के पैतृक घर के बाहर बम फेंकने की घटना सामने आई है।

धनबाद में जज के ‘मर्डर’ का CCTV फुटेज वायरल होने पर सब इंस्पेक्टर सस्पेंड, अब तक 243 से पूछताछ: रिपोर्ट

झारखंड के धनबाद में जज उत्तम आनंद के मामले में सीसीटीवी फुटेज वायरल होने पर एक सब इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है।

हादसा या हत्या: धनबाद जज उत्तम आनंद मामले में ऑटो के पीछे जा रहे बाइक सवार की तलाश, आखिर रुका क्यों नहीं?

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि उनके सिर पर लोहे की किसी भारी चीज से वार किया गया। साथ ही सीने पर भी गहरी चोट थी।

धनबाद में जज की दिनदहाड़े हत्या पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, स्वत: संज्ञान ले झारखंड सरकार से हफ्ते भर में माँगी रिपोर्ट

धनबाद में जज उत्तम आनंद की दिनदहाड़े हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए झारखंड के मुख्य सचिव और डीजीपी से एक हफ्ते में रिपोर्ट माँगी की है।

‘बिग टेक प्रभावित कर रहे लोकतांत्रिक प्रक्रिया, फेकबुक नहीं झाड़ सकता पल्ला’: जानिए SC की टिप्पणी क्यों है बेहद खास

SC और दिल्ली HC की ओर से आई टिप्पणियाँ बताती हैं कि लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में इन टेक कंपनियों की भूमिका को लेकर वह चिंतित और सतर्क दोनों है।

‘मनमाना फैसला न आने पर कॉन्ग्रेसी गिरोह ने हमेशा न्यायपालिका के खिलाफ अभियान चलाकर उसे कमजोर किया’

कॉन्ग्रेस के यह फैसले न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर स्पष्ट हमला थे। SC के जजों के निष्कासन को सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस और वाम दलों ने पूरी तरह से सही ठहराया था।

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