निखिल गुप्ता ने चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण से बचने के लिए वहाँ के स्थानीय कोर्ट में याचिका भी लगाई थी लेकिन मई, 2024 में कोर्ट ने उसके प्रत्यर्पण का रास्ता साफ़ कर दिया था।
दिल्ली पुलिस को जैसे ही खालिस्तानी नारे लिखे जाने की सूचना मिली, तुरंत टीम ने घटनास्थल के लिए कूच किया। वहाँ लिखे देश विरोधी नारों को फ़िलहाल मिटा दिया गया है।
हकीकत ये है कि ट्रूडो सरकार अब खुलकर खालिस्तानी आतंकवादियों का समर्थन कर रही है, उन्हें बचा रही है और भारत विरोधी कार्यक्रमों को जारी रखने की छूट दे रही है।