Friday, April 16, 2021

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Politics

मिथुन दा के बाद क्या बीजेपी में शामिल होंगे सौरभ गांगुली? इंटरव्यू में खुद किया बड़ा खुलासा: देखें वीडियो

लंबे वक्त से अटकलें लगाई जा रही हैं कि बंगाल टाइगर के नाम से प्रख्यात क्रिकेटर सौरव गांगुली बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। गांगुली ने जो कहा, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दादा का विचार राजनीति में आने का है।

मनी लॉन्ड्रिंग में टाइट हुई एजेंसी तो रॉबर्ट वाड्रा को याद आई पॉलिटिक्स, संसद में जाने की जताई इच्छा

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने राजनीति में उतरने और चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।

नेपाल में अब ‘लाल सलाम’ नहीं, अपनों को ‘सड़ा हुआ फल’ ब​ता रहे कॉमरेड: खिसियानी ओली, प्रचंड और माधव को नोचे

पीएम ओली ने कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक में पूर्व पीएम (प्रचंड और माधव) के लिए 'सड़े हुए आम जो गिर पड़े हैं' वाली कहावत का प्रयोग किया।

‘ईश्वर की चेतावनी’ के बाद रजनीकांत ने त्यागा राजनीति में आने का प्लान, तमिलनाडु चुनाव में ‘थलाइवा’ की ‘नो एंट्री’

अस्पताल से निकलने के बाद सुपरस्टार रजनीकांत ने कहा कि ईश्वर ने उन्हें एक चेतावनी दी है, जिसका अनुपालन करते हुए वो राजनीति में नहीं आएँगे।

वो गुरुजी के गुरुजी थे: जिनकी वजह से डॉ. आंबेडकर की भी थी संघ से नजदीकी

जब 1907 में सूरत में कॉन्ग्रेस पार्टी का अधिवेशन हो रहा था तो दोनों हिस्सों के बीच तल्खियाँ बढ़ गईं। इस वक्त बीएस मुंजे ने खुलकर तिलक का समर्थन किया और यही वजह रही कि तिलक के वो भविष्य में भी काफी करीबी रहे।

संविधान दिवस: आरक्षण किसे और कब तक, समान नागरिक संहिता पर बात क्यों नहीं? – कुछ फैसले जो अभी बाकी हैं

भारत की धर्म निरपेक्षता के खोखलेपन का ही सबूत है कि हिंदुओं के पास आज अपनी एक 'होम लैंड' नहीं है जबकि कथित अल्पसंख्यक...

सिंहासन खाली हुई लेकिन जनता नहीं, सत्तालोलुप नेता आए: जेपी के वो चेले, जिन्होंने उड़ा दी गुरु की ही ‘धज्जियाँ’

यूपी-बिहार ही नहीं, पूरे देश में कई ऐसे बड़े नेता हैं, जो आज राजनीति के इस मुकाम पर इसीलिए हैं क्योंकि उन पर कभी जयप्रकाश नारायण का हाथ था। लेकिन, इन नेताओं की प्राथमिकता में जनता कभी रही ही नहीं।

सबको नहीं हो वोट देने का अधिकार: ‘अर्जुन रेड्डी’ फेम विजय बोले, मैं तानशाह बनना चाहूँगा

तेलुगु अभिनेता विजय देवरकोंडा ने एक इंटरव्यू में वर्तमान सिस्टम के प्रति असंतोष जताते हुए तानाशाही की वकालत की है।

नर्क से भी बड़ी यातना: चित्रगुप्त ने उस जीव को एक ढपली दी, ‘आजादीईईई’ का नारा दिया… मगर टिकट नहीं दी

उत्पाती युवक को पता था कि नीचे उन्हीं की सरकार है जिन्हें कोसने में उसने पिछले 5 साल बिताए हैं। अगले कई वर्षों तक भी यही व्यवस्था रहने वाली थी, ये भी उसे मालूम था।

‘यही मौका है’: हाथरस पर पॉलिटिक्स को लेकर शशि थरूर बोले- क्या लोकतंत्र में राजनीति करना मना है

कॉन्ग्रेस पर हाथरस मामले पर राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं। अब शशि थरूर के एक बयान ने इसकी पुष्टि भी कर दी है।

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