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जिन ‘बंगबंधु’ ने बांग्लादेश बनाया, उनको ही नोटों से यूनुस सरकार ने हटाया: पहले राष्ट्रपति के दफ्तर से हटाई थी फोटो, कैंसिल कर दी थी उनके नाम की छुट्टियाँ

यह पहला मौका नहीं है जब बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने मुजीबुर रहमान की स्मृतियाँ मिटाने का प्रयास किया है। इससे पहले यूनुस सरकार के एक मंत्री (एडवाइजर) महफूज आलम ने राष्ट्रपति के दफ्तर बांग्ला भवन के दरबार हॉल से मुजीबुर रहमान की फोटो हटा दी थी।

बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट कर्ट करके आई मोहम्मद यूनुस सरकार राष्ट्रपिता मुजीबुर रहमान की निशानियों को मिटाने में जुटी हुई है। इस्लामी कट्टरपंथ और पाकिस्तान की विचारधारा पर चलते हुए अब यूनुस सरकार ने बांग्लादेश की करेंसी पर से भी बंगबंधु की फोटो हटाने का फैसला कर लिया है। उनकी जगह पर जुलाई में हुए तख्तापलट की तस्वीरें नोटों पर छापी जाएँगी। इससे पहले मुजीबुर रहमान का इतिहास मिटाने के लिए और कई कारस्तानियाँ यूनुस सरकार कर चुकी है।

बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, देश की सेंट्रल बैंक ने नए नोटों की छपाई चालू कर दी है। सेंट्रल बैंक 100, 200, 500 और 1000 टका के नोटों की छपाई कर रही है। इनकी छपाई बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के आदेश पर हो रही है।

इन नोटों पर मुजीबुर रहमान की फोटो नहीं होगी। इनसे यह हटा दी गई है। इनकी जगह पर जुलाई-अगस्त में हुए इस्लामी कट्टरपंथियों के प्रदर्शन की तस्वीरों को इन नोटों पर लगाई जाएँगी। इसके अलावा इन नोटों पर बांग्लादेश की मस्जिदों और बाकी धार्मिक स्थलों की फोटो इन पर छापी जाएगी।

यह नोट अगले 6 महीने के भीतर बाजार में आएँगे। पहले बड़े नोटों पर मुजीबुर रहमान की फोटो हटाई जा रही है, इसके बाद सभी प्रकार की करेंसी नोट पर यही नीति लागू की जाएगी। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 29 सितम्बर, 2024 को इन नोटों की डिजाइन बदलने को लेकर सेंट्रल बैंक को कहा था, जिनकी डिजाइन अब फाइनल हो गई है।

हालाँकि, यह पहला मौका नहीं है जब बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने मुजीबुर रहमान की स्मृतियाँ मिटाने का प्रयास किया है। इससे पहले यूनुस सरकार के एक मंत्री (एडवाइजर) महफूज आलम ने राष्ट्रपति के दफ्तर बांग्ला भवन के दरबार हॉल से मुजीबुर रहमान की फोटो हटा दी थी।

बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने सत्ता में आते ही 8 छुट्टियों को भी रद्द कर दिया था। यह छुट्टियाँ बंगबंधु की हत्या की तारीख और बाकी घटनाओं से जुड़ी हुई थीं। यहाँ तक कि बांग्लादेश मुक्ति युद्ध से जुड़ी फोटो भी हटा दी गईं थी। यूनुस सरकार में शामिल एडवाइजर मुजीबुर रहमान को ‘फासिस्ट’ बता चुके हैं।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में मुजीबुर रहमान के साथ वही बर्ताव किया जा रहा है जो पाकिस्तान में किया जाता रहा है। पाकिस्तानी मुजीबुर रहमान से घृणा करते आए हैं, वह उन्हें पाकिस्तान तोड़ने का दोषी मानते हैं। बांग्लादेश में अब तक मुजीबुर रहमान को करोड़ों बंगालियों को मुक्ति दिलाने वाले नायक माना जाता रहा है। इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा के सहारे सत्ता में आई यूनुस की अंतरिम सरकार इन सब चीजों को मिटाना चाहती है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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