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25 साल जेल में बंद रहा, राष्ट्रपति ने भी ठुकराई याचिका, अब सुप्रीम कोर्ट ने माना ‘नाबालिग’; जिंदा व्यक्ति की ‘हत्या’ में 4 को जेल में ठूँस दिया… इस सिस्टम का क्या करें?

2001 में पकड़े जाने और सजा दिए जाने के बाद ओम प्रकाश ने 7-8 बार अलग-अलग कोर्ट के सामने खुद के नाबालिग होने का दावा किया, लेकिन सिस्टम की गलती के चलते उसे 25 वर्ष बाद न्याय मिला।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे शख्स को रिहा किया है जो लगभग 25 वर्ष से ही जेल में बंद था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि जब उसने अपराध किया था तब वह नाबालिग था और जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक उसके नाबालिग होने की बात को पहले नहीं स्वीकार किया गया। उसे पहले मौत की सजा मिली थी लेकिन राष्ट्रपति ने इसे उम्रकैद में बदल दिया था। अब उसकी उम्र को लेकर सच्चाई पता चलने के बाद उसे आजादी मिली है। वहीं उत्तर प्रदेश में पुलिस ने एक ऐसे शख्स को ढूँढा है, जिसकी हत्या के आरोप में 4 लोग जेल भी काट चुके हैं।

हाई कोर्ट से राष्ट्रपति तक न्याय के लिए लड़ी लड़ाई

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (8 जनवरी, 2025) को ओम प्रकाश नाम के शख्स को लगभग 25 वर्ष की जेल के बाद रिहा किया है। ओम प्रकाश को 1994 में उसके मालिक और परिवार की हत्या करने के दोष में यह जेल की सजा हुई थी। ओम प्रकाश को 2001 में पुलिस ने पकड़ा था। उसने बताया था कि 2001 में वह 20 वर्ष का था। इस मामले में निचली अदालत ने उसे बालिग़ के तौर पर सजा दी थी। निचली अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने भी उसकी सजा बरकरार रखी। हालाँकि, ओमप्रकाश ने दावा किया कि वह नाबालिग था।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी सजा बरकरार रखी और नाबालिग वाले दावे को नहीं माना। उसकी पुनर्विचार याचिका भी ठुकराई गई। यहीं यह मामला नहीं रुका। ओम प्रकाश ने इसके बाद इस मामले में राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की। यहाँ भी उसकी याचिका ठुकरा दी गई। जब उसने दूसरी बार राष्ट्रपति को यह याचिका दी तो उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया और कहा कि जब तक वह 60 साल का नहीं हो जाता, तब तक उसे रिहा नहीं किया जाएगा।

ओमप्रकाश थक हार कर फिर नाबालिग वाला दावा लेकर सुप्रीम कोर्ट के पास पहुँचा लेकिन इस बार उसका कोर्ट ने उसका केस लेने से ही इनकार कर दिया। खुद के नाबालिग होने का 2019 में उसने फिर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन फिर याचिका ख़ारिज कर दी गई। इसी दौरान उसकी हड्डियों का एक टेस्ट किया गया जिसमें साफ़ हुआ कि घटना के समय वह लगभग 14 वर्ष का रहा होगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में उसे 7 जनवरी, 2025 को रिहा करने का आदेश दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “यह एक ऐसा मामला है जिसमें व्यक्ति कोर्ट गई गलती के कारण पीड़ित है। हमें बताया गया है कि जेल में उसका आचरण सामान्य रहा है, उसके खिलाफ कोई रिपोर्ट नहीं है। उसने समाज में फिर से घुलने-मिलने का अवसर खो दिया। उसने जो समय खोया है, वह उसकी किसी गलती के बिना कभी वापस नहीं आ सकता।” 2001 में पकड़े जाने और सजा दिए जाने के बाद ओम प्रकाश ने 7-8 बार अलग-अलग कोर्ट के सामने खुद के नाबालिग होने का दावा किया, लेकिन सिस्टम की गलती के चलते उसे 25 वर्ष बाद न्याय मिला।

जिसकी हत्या में 4 को जेल, वह जिंदा मिला

सिस्टम की विफलता से नुकसान सिर्फ ओम प्रकाश को ही नहीं हुआ बल्कि बिहार में भी 4 लोग इसका शिकार हुए। बिहार के एक शख्स को हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस ने झाँसी में रात को पेट्रोलिंग के दौरान देखा। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि यह शख्स नथुनी पाल बिहार के देवरिया का रहने वाला है और वह बीते डेढ़ दशक से उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जगह रह रहा है। जब पुलिस ने स्थानीय थाने से जानकारी ली तो पता चला कि जिस शख्स को उन्होंने ढूँढा है, उसके मर्डर के लिए बिहार में 4 लोगों पर मुकदमा चल रहा है।

यह मुकदमा नथुनी पाल के चाचा और तीन चचेरे भाइयों के खिलाफ ही दर्ज करवाया गया था। मुकदमा नथुनी पाल के मामा ने दर्ज करवाया था। इस मामले में चारों लोग 8 माह की जेल भी काट चुके हैं। अभी वह जमानत पर बाहर हैं। अब इस खबर के बाद उन्होंने हत्या का दाग धुलने पर ख़ुशी जताई है। वहीं दोनों जगह की पुलिस अब मामले को लेकर आगे कार्रवाई में जुटी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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