कर्नाटक में वोटर लिस्ट से नाम हटाने के मामले में कॉन्ग्रेस और चुनाव आयोग के बीच टकराव बढ़ गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने गुरुवार (18 सितंबर 2025) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि आलंद विधानसभा क्षेत्र में 6,018 वोटरों के नाम सॉफ्टवेयर से डिलीट करने की कोशिश की गई, जो खासकर कॉन्ग्रेस समर्थक वोटरों को निशाना बना रही थी।
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने राहुल के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। CEO ने बयान जारी कर कहा कि 2023 में आलंद में 6,018 फॉर्म-7 आवेदनों में से सिर्फ 24 वैध थे, बाकी 5,994 फर्जी थे। इनकी जाँच के बाद फरवरी 2023 में ही FIR दर्ज हुई और 6 सितंबर 2023 को कलबुर्गी पुलिस को ऑब्जेक्टर का नाम, मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और फॉर्म डिटेल्स सौंप दी गईं।
Aland Case 2023@ECISVEEP pic.twitter.com/Z35F0PlWPW
— Chief Electoral Officer, Karnataka (@ceo_karnataka) September 18, 2025
CEO ने जोर देकर कहा कि कोई भी नाम ऑनलाइन डिलीट नहीं हो सकता, हर डिलीशन के लिए सुनवाई जरूरी है। चुनाव आयोग ने भी राहुल के आरोपों को ‘गलत और बेबुनियाद’ बताया। राहुल ने एक हफ्ते में जानकारी देने की माँग की, लेकिन आयोग ने कहा कि आलंद में कॉन्ग्रेस ने ही 2023 चुनाव जीता था।
बता दें कि राहुल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘वोट चोरों’ को बचाने का इल्जाम लगाया था। राहुल ने कहा कि कर्नाटक CID की जाँच को रोकने के लिए चुनाव आयोग 18 महीनों से जरूरी तकनीकी जानकारी जैसे आईपी एड्रेस, डिवाइस पोर्ट और OTP ट्रेल्स नहीं दे रहा। अब कर्नाटक CEO ने उनके सभी आरोप खारिज कर दिए हैं।

