फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान में हुई गंभीर घटना की जाँच में एक बड़ा मोड़ आ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उड़ान के मुख्य पायलट (पायलट-इन-कमांड) का दूसरा कंफर्मेटरी (पुष्टि करने वाला) ड्रग टेस्ट भी पॉजिटिव पाया गया है। यह नया घटनाक्रम उस हादसे के कुछ दिनों बाद आया है, जब उड़ान के दौरान विमान अचानक ऊँचाई से नीचे गिर गया था, जिससे कई यात्री और क्रू मेंबर घायल हो गए थे और भारत के उड्डयन प्राधिकारियों ने इस पर व्यापक जाँच शुरू कर दी थी।
फ्लाइट के बाद हुए शुरुआती टेस्ट में कैप्टन के सैंपल में नशीले पदार्थों की मौजूदगी का संकेत मिला था। चूँकि प्राथमिक जाँच टेस्ट के बाद प्रयोगशाला में दोबारा पुष्टि की आवश्यकता होती है, इसलिए पायलट के सैंपल की दोबारा जाँच की गई। अब वह दूसरा टेस्ट भी रिपोर्ट के अनुसार पॉजिटिव आया है। इस नई रिपोर्ट ने इस घटना से जुड़ी सुरक्षा और नियमों की चिंताओं को बहुत बढ़ा दिया है।
टेस्ट ने खड़े किए नए सवाल
शुरुआती ड्रग स्क्रीनिंग के बाद ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने दोनों पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया था, ताकि मामले की जाँच की जा सके। उस समय अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले प्राथमिक रिपोर्ट की पुष्टि के लिए दूसरा टेस्ट करना जरूरी है।
यह दूसरा टेस्ट इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रयोगशाला विश्लेषण के जरिए पहली जाँच के नतीजों की पुष्टि करता है। मंगलवार (11 अगस्त 2026) को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पायलट-इन-कमांड का कंफर्मेटरी टेस्ट पॉजिटिव आया है और सैंपल में गांजा (Marijuana) होने की पुष्टि हुई है। हालाँकि, इस टेस्ट के सटीक विवरण और जाँच के आधिकारिक निष्कर्षों का पूरी तरह से खुलासा होना अभी बाकी है।
ड्रग टेस्ट का पॉजिटिव आना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उड़ान के दौरान पायलट नशे में था या उसका मानसिक नियंत्रण प्रभावित था। मेडिकल जाँच में नशीले पदार्थ का मिलना यह बताता है कि व्यक्ति के शरीर में वह substance मौजूद है, जबकि यह तय करने के लिए कि क्या पायलट उड़ान के समय सच में असमर्थ था, एक व्यापक जाँच की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद, यह नतीजा एक गंभीर नियम उल्लंघन है, क्योंकि उड़ान दल के सदस्यों पर नशीले पदार्थों के सेवन को लेकर बेहद कड़े नियम लागू होते हैं।
इसलिए, इस घटना ने यह सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या पायलट ने उड्डयन सुरक्षा नियमों का पालन किया था और क्या सैंपल में मिला पदार्थ उसकी उड़ान भरने की क्षमता पर असर डाल सकता था।
पायलट पर लग सकता है उड़ानों से स्थायी प्रतिबंध
शुरुआती रिपोर्ट के बाद ही DGCA ने जाँच पूरी होने तक दोनों पायलटों को रोस्टर से हटा दिया था। अब दूसरे टेस्ट का पॉजिटिव आना मुख्य पायलट के खिलाफ सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई को और मजबूती देता है।
विमानन सुरक्षा नियमों के अनुसार, प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की जाँच में पॉजिटिव पाए जाने वाले पायलटों की उड़ान सेवाएँ निलंबित की जा सकती हैं और उनकी आगे मेडिकल और कानूनी समीक्षा होती है। परिस्थितियों और जाँच के नतीजों के आधार पर, किसी भी पायलट को दोबारा उड़ान की अनुमति देने से पहले नशा-मुक्ति (rehabilitation/de-addiction) प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।
इसी वजह से, कानूनी और नियमन प्रक्रिया जारी रहने तक कैप्टन के दोबारा विमान उड़ाने की संभावना न के बराबर है। उनके लाइसेंस और नौकरी पर अंतिम फैसला DGCA की जांच रिपोर्ट और नियमों के आधार पर ही किया जाएगा।
एयर इंडिया और उड्डयन अधिकारी जाँच के दायरे में
इस नए खुलासे के बाद एयर इंडिया के सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा और कड़ी कर दी गई है। इस घटना को एक बेहद गंभीर विमानन घटना माना जा रहा है, और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को यह जांच सौंप दी गई है कि विमान में असल में क्या हुआ था।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA ने कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि जाँच प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
दूसरी ओर, एयर इंडिया भी इस उच्चस्तरीय जांच के दायरे में आ गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA के वरिष्ठ अधिकारियों ने एयर इंडिया के सीईओ (CEO) को बैठकों के लिए तलब किया है। एयर इंडिया ने पहले कहा था कि उसे उड़ान के बाद हुए टेस्ट की जानकारी थी, लेकिन शुरुआत में टेस्ट के नतीजे उसके साथ साझा नहीं किए गए थे।
यह गहन जाँच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ड्रग-टेस्ट का मामला इस पूरी उड़ान घटना की जांच का केवल एक हिस्सा है।
तकनीकी खराबी के पहलू की भी हो रही है जाँच
हालाँकि पायलट के कंफर्मेटरी टेस्ट ने इस मामले को एक नया मोड़ दिया है, लेकिन जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि क्या विमान में आई किसी तकनीकी खराबी के कारण अचानक उसकी ऊंचाई कम हुई थी।
शुरुआती रिपोर्टों में एयरबस विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम (Hydraulic System) में कई खराबी आने की बात कही गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या तकनीकी खराबी ने इस घटना में भूमिका निभाई। यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि केवल ड्रग-टेस्ट के नतीजों को प्लेन के इस व्यवहार का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। जांचकर्ताओं को एयरक्राफ्ट डेटा, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और अन्य सबूतों के जरिए पूरी घटना के क्रम का सही पता लगाना होगा।
इस जांच में फ्रांस की उड्डयन जांच एजेंसियों और एयरबस के प्रतिनिधियों के भी शामिल होने की उम्मीद है। उनकी मदद से यह तय करने में आसानी होगी कि क्या हाइड्रोलिक समस्या समेत विमान प्रणाली की किसी खराबी से यह हादसा हुआ था।
AAIB की यह जांच अंततः यह स्थापित करेगी कि यह घटना मुख्य रूप से तकनीकी खराबी के कारण हुई, क्रू मेंबर्स की वजह से हुई, मौसम/पर्यावरण के कारणों से हुई, या इन सभी परिस्थितियों का मिला-जुला परिणाम थी।
अचानक गिरा था विमान
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले खबर आई थी फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट को उड़ान के दौरान एक गंभीर झटके का सामना करना पड़ा था और रिपोर्ट के अनुसार विमान अचानक लगभग 300 फीट नीचे गिर गया था। इस हादसे में कई यात्री और क्रू मेंबर्स घायल हो गए थे, जिसके बाद तुरंत जांच शुरू की गई।
इसके बाद विमान दिल्ली में सुरक्षित उतर गया था। DGCA ने इसे एक गंभीर घटना की श्रेणी में रखा और AAIB को विस्तृत जांच का जिम्मा सौंपा।
फिलहाल यह जाँच दो अलग-अलग दिशाओं में चल रही है: एक ओर जहां फ्लाइट क्रू के आचरण और उनकी फिटनेस की जांच हो रही है, वहीं दूसरी ओर विमान के उपकरणों और अचानक आई गिरावट से जुड़ी परिस्थितियों का अध्ययन किया जा रहा है।
आगे क्या होगा?
DGCA से जल्द ही इस कंफर्मेटरी टेस्ट पर और स्पष्टता देने की उम्मीद है, जिसमें यह बताया जाएगा कि कौन सा पदार्थ कितनी मात्रा में मिला और आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों को यह भी तय करना होगा कि इस टेस्ट के नतीजे का उड़ान के दौरान घटी घटना से कोई सीधा संबंध था या नहीं।
इसके साथ ही, जांचकर्ता विमान के तकनीकी सिस्टम, ब्लैक बॉक्स/फ्लाइट-डेटा रिकॉर्डर और अन्य सबूतों की जांच जारी रखेंगे ताकि ऊंचाई में अचानक आई गिरावट का असली कारण पता चल सके। एयरबस और फ्रांस के एविएशन एक्सपर्ट्स इस काम में मदद करेंगे।
फिलहाल, दूसरे टेस्ट में पॉजिटिव आने के कारण मुख्य पायलट गंभीर कानूनी और प्रशासनिक जांच का सामना कर रहे हैं। हालांकि, फुकेत-दिल्ली घटना पर अंतिम फैसला पूरी जांच के नतीजों, तकनीकी साक्ष्यों और पायलट के मेडिकल असेसमेंट के बाद ही आएगा।
नतीजतन, यह मामला एयर इंडिया और भारत के एविएशन रेगुलेटर (DGCA) दोनों की विमानन सुरक्षा व्यवस्था की एक बड़ी परीक्षा बन गया है, जहां अधिकारियों पर यह दबाव है कि वे पूरी घटना की सच्चाई सामने लाएँ और उचित जवाबदेही तय करें।


