केंद्र सरकार ने बुधवार (12 अगस्त 2026) को विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA बिल) को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव रखा और यह पारित भी हो गया है। इस बीच संसद में विपक्ष के लगातार हंगामे और कार्यवाही बाधित करने का सिलसिला भी जारी रहा।
कार्यसूची की पूरक सूची के अनुसार, प्रस्तावित JPC में लोकसभा के 21 सदस्य होंगे, जिन्हें लोकसभा अध्यक्ष नामित करेंगे। वहीं, राज्यसभा के 10 सदस्यों को सभापति नामित करेंगे।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि समिति को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। समिति की बैठक के लिए कुल सदस्यों की एक-तिहाई संख्या कोरम होगी। बाकी मामलों में समिति संसद की समितियों के लिए तय नियमों के तहत काम करेगी, हालाँकि लोकसभा अध्यक्ष जरूरत के अनुसार इनमें बदलाव कर सकते हैं।
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब मानसून सत्र के दौरान संसद में लगभग लगातार सरकार और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला है। विपक्ष 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की माँग कर रहा है। इसके अलावा राम मंदिर चंदा चोरी के विवाद का मुद्दा भी विपक्ष उठा रहा है।
बुधवार को ही राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एफसीआरए विधेयक को जेपीसी के पास भेजने की माँग का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “इसे भेजा जाना चाहिए।” हालाँकि, सूत्रों के मुताबिक विपक्ष की बड़ी माँग यह है कि प्रस्तावित कानून को पूरी तरह वापस ही ले लिया जाए।
FCRA संशोधन विधेयक क्या है?
FCRA भारत में व्यक्तियों, संस्थाओं और संगठनों को मिलने वाले विदेशी चंदे और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है। इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन को उन्हीं उद्देश्यों के लिए लिया और इस्तेमाल किया जाए, जिनके लिए वह प्राप्त हुआ है और उसका उपयोग कानून में तय नियमों के मुताबिक हो।
विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 को 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था और फिलहाल संसद में इस पर विचार चल रहा है। सरकार ने 22 जून को FCRA के संशोधित नियम, 2026 अधिसूचित किए थे, जो अब लागू हो चुके हैं।
संशोधन विधेयक को जेपीसी के पास भेजने के फैसले के साथ सरकार ने इस प्रस्तावित कानून की दोनों सदनों के सदस्यों वाली समिति के जरिए विस्तार से जाँच का रास्ता खोल दिया है। समिति विधेयक के प्रावधानों की बारीकी से समीक्षा करेगी और तय समयसीमा के भीतर अपनी सिफारिशें देगी।
मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने वाला है। ऐसे में सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव के बीच संसद के पास इस मुद्दे पर आगे की कार्यवाही के लिए समय भी काफी सीमित रह गया है।

