राजस्थान हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद पर हत्या के आरोप में मामला दर्ज करने की माँग वाली याचिका खारिज कर दी है। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर ₹50 हजार का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला नागरिकता संशोधन कानून (CAA), 2019 से जुड़ा था।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता पुरन चंदर सेन ने CAA के विरोध में हुई हत्या वाले अपने दावे से जुड़े कोई सबूत कोर्ट में पेश नहीं किए, उन्होंने यह नहीं बताया कि कितने लोग मारे गए, कौन घायल हुआ और कहाँ घटना हुई। इस पर कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा, “याचिकाकर्ता के आरोप केवल उसके भ्रम और पक्षपातपूर्म सोच का नतीजा है। कोई समझदार व्यक्ति ऐसे बेबुनियाद और बेतुके आरोप लगाकर FIR दर्ज करने की माँग नहीं कर सकता।”
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर सरकार को निशाना बनाने के इरादे से ये आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने अधिवक्ता पुरन चंदर सेन को कानून के दायरे में रहकर काम करने की सलाह दी और कहा कि सस्ती लोकप्रियता के लिए मनमाने ढंग से काम नहीं करना चाहिए।
साथ ही हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व कानून मंत्री प्रसाद और अन्य को यह स्वतंत्रता दी कि वे चाहें तो सेन के खिलाफ कानून के तहत सिविल या आपराधिक कार्रवाई कर सकते हैं।
याचिका में क्या आरोप लगाए?
यह मामला साल 2020 में CAA के विरोध में भारत के कई हिस्सों में हुए विरोध से संबंधित है। साल 2020 में 74 साल के पुरन चंदर सेन ने अलवर जिले के गोविंदगढ़ थाने में शिकायत दी थी।
शिकायत में पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, कुछ आजतक और रिपब्लिक टीवी के कुछ पत्रकारों और दक्षिणपंथी संगठनों के खिलाफ हत्या (धारा 302), आपराधिक साजिश (धारा 120-B) और भारतीय दंज संहिता की अन्य धाराओं के तहत FIR दर्ज कराने की माँग की गई थी।
सेन का आरोप था कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) भारत के संविधान की भावना के खिलाफ है और इसे मुसलमानों और सेकुलर सोच वालों को दबाने के इरादे से लाया गया। सेन ने दावा किया कि इस कानून के चलते देशभर में हिंसा हुई, जिसमें कई लोग मारे गए और घायल भी हुए।
लेकिन जब पुलिस ने सेन की शिकायत पर कार्रवाई नहीं की तो उन्होंने मजिस्ट्रेट कोर्ट का रुख किया। वहाँ भी उनकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद उन्होंने सेशंस कोर्ट में अपील की लेकिन वहाँ भी फैसला उनके खिलाफ गया। अब राजस्थान हाई कोर्ट ने भी सेन की याचिका को बेतुका बताकर खारिज कर दिया है।

