बांग्लादेश की आर्मी ने रविवार (28 सितंबर 2025) को खगराछड़ी जिले के गुईमारा उपजिला में जनजातीय समाज पर हमला किया। यह हमला उस समय हुआ जब जनजातीय समाज ने एक नाबालिग जनजातीय लड़की के साथ हुए रेप के विरोध में सड़क को जाम किया।
जनजातीय नाबालिग लड़की से रेप की घटना 23 सितंबर 2025 की है। ट्यूशन से लौटते वक्त लड़की का 3 बंगाली युवकों ने रेप किया। इस मामले में जनजातीय समाज स्थानीय प्रशासन से कार्रवाई की माँग कर रहा है। हालाँकि, पुलिस ने एक आरोपित शोयोन शील को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी दो आरोपित फरार हैं।
Bangladesh Army today morning killed at least 4 indigenous people, injured over 40 others and let loose the illegal Muslim settlers at Guimara area under the Chittagong Hill Tracts today 28/09/2025. The targeted tribal people belong to the Marma/Mog community.
— Suhas Chakma (@ChakmaSuhas) September 28, 2025
The indigenous… pic.twitter.com/RoMwyJGQ3Q
न्याय की माँग को लेकर जनजातीय समुदाय ने ‘जुम्मा छात्र जनता’ के बैनर तले सड़कें जाम कीं। लोगों ने सड़कों पर बैरिकेड लगाए, टायर जलाए, पेड़ काटे और खगराछड़ी से ढाका, चटगाँव और रंगामाटी के बीच सड़क संपर्क बाधित कर दिया।
इसके बाद 27 सितंबर 2025 को बंगाली मुस्लिमों और आदिवासी जनजातियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। कई घरों को आग लगा दी गई और दुकानों में लूटपाट भी मचाई गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी, जिससे 4 या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लग गई।
Why is Guimara, Khagrachari, Bangladesh bleeding??
— Antan Chakma (@antan_chakma) September 28, 2025
The army opened fire on indigenous students and people – many were shot and injured, though the exact number is not confirmed.
Settler Bengalis looted and set fire to shops in Ramsu Bazaar.
In Khagrachari, when an indigenous… pic.twitter.com/kA2qshl5xV
इसके बावजूद जब जनजातीय लोग पीछे नहीं हटे और न्याय की माँग पर डटे रहे तो रविवार (28 सितंबर 2025) को बांग्लादेशी आर्मी ने उन पर हमला कर दिया। सूत्रों के अनुसार, इस हमले में करीब 4 जनजातीय लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए हैं।
इससे पहले सितंबर 2024 में ऑपइंडिया ने रिपोर्ट किया था कि मुस्लिम भीड़ ने चटगाँव डिवीजन के दीघिनाला और खगराछड़ी सदर में बौद्ध चकमा और हिंदू त्रिपुरी समुदायों पर हमला किया था। उस हिंसा में 200 से अधिक दुकानों और घरों को आग लगा दी गई थी और एक बौद्ध मंदिर पर भी हमला हुआ था।

