‘भारत मंथन 2025: नक्सलमुक्त भारत’ के समापन सत्र में बोलते हुए शाह ने यह भी कहा कि उन ‘शहरी नक्सलियों’ को भी चिन्हित कर रोकना होगा जो वैचारिक, कानूनी और आर्थिक मदद देकर आंदोलन को जिंदा रख रहे हैं। उन्होंने CPI (माओवादी) के सीजफायर प्रस्ताव को भ्रामक बताया और वामपंथी दलों पर निशाना साधा कि वे नक्सलियों के साथ क्यों ज्यादा सहानुभूति रखते हैं।
नई दिल्ली में @spmrfoundation द्वारा ‘नक्सलमुक्त भारत: पीएम मोदी के नेतृत्व में लाल आतंक का अंत’ पर आयोजित भारत मंथन-2025 से लाइव…#NaxalFreeBharat https://t.co/2ybxfTjwwi
— Amit Shah (@AmitShah) September 28, 2025
शाह ने याद दिलाया कि एक समय रेड कॉरिडोर ‘पशुपति से तिरुपति’ तक फैलने का सपना था, पर अब नक्सलवाद देश के केवल 17% हिस्से में सीमित है। संबोधन के दौरान गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़ में पिछले दो वर्षों में 2,106 नक्सलियों के आत्मसमर्पण, 1,770 गिरफ्तारी और 560 के मारे जाने का आँकड़ा भी बताया, साथ ही दावा किया कि पिछले दो सरकारों (मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी) के 10-10 साल की तुलना में सुरक्षा बलों की शहादत और नागरिकों की मौतें क्रमशः 73% और 74% कम हुई हैं।
शाह ने कहा कि पिछली सरकारों ने नक्सलवाद से लड़ने के लिए ‘बिखरी और प्रतिक्रिया आधारित’ नीति अपनाई थी, जबकि मोदी सरकार ने ‘एकजुट और कठोर’ रणनीति पर काम किया। उन्होंने कहा, “जो हथियार डाल देंगे, उनका स्वागत रेड कार्पेट बिछाकर किया जाएगा, लेकिन जो निर्दोषों की हत्या करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। यह हमारी ‘नो कन्फ्यूजन पॉलिसी’ है।”
गृह मंत्री ने बताया कि पिछले दो साल में सुरक्षाबलों ने 108 बड़े नक्सलियों को मार गिराया है। केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त एंटी-नक्सल फोर्स ने नक्सलियों के खिलाफ आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर बड़ी सफलता हासिल की है। इसमें लोकेशन और मोबाइल ट्रैकिंग, फॉरेंसिक जाँच, सोशल मीडिया विश्लेषण और हथियारों व फंडिंग की सप्लाई लाइन को काटना शामिल है।
भारत का नक्सलवाद के खिलाफ दशकों पुराना संघर्ष अब अपने सबसे निर्णायक दौर में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्षों की कार्रवाई के बाद CPI (माओवादी) का शीर्ष नेतृत्व अब सिर्फ 13 लोगों तक सिमट गया है, जिसमें 4 पोलित ब्यूरो और 9 केंद्रीय समिति के सदस्य हैं।
हालाँकि, खूफिया एजेंसियों की ओर से आशंका जताई गई है कि पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के कुछ बचे हुए गुट हमले तेज कर सकते हैं। डोजियर के अनुसार, PLGA का मुखिया और मोस्ट वांटेड मदवी हिडमा अब कई शीर्ष नेताओं के संपर्क में नहीं है, जिससे माओवादी संगठन का नेटवर्क और कमजोर हुआ है।

