उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने मस्जिद पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
यह मस्जिद असमोली क्षेत्र के राया बुजुर्ग गाँव में स्थित है और प्रशासन के अनुसार, इसका नाम गौसुलबरा मस्जिद है। यह मस्जिद सरकारी तालाब की जमीन पर करीब 10 साल पहले बनाई गई थी। इसका निर्माण गाँव के ही मिंजार हुसैन ने करवाया था, जो खुद इस मस्जिद का मौलाना और मुतव्वली (प्रबंधक) भी है।
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, यह जमीन अवैध अतिक्रमण के अंतर्गत आती है। जिले में चल रहे सरकारी जमीनों के सर्वे में इस मस्जिद का भी पता चला, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई शुरू की गई। गुरुवार (2 अक्टूबर 2025) को जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की अगुवाई में प्रशासन बुलडोजर लेकर मस्जिद तोड़ने के लिए पहुँचा था।
सबसे पहले मस्जिद के पास बने एक मैरिज हॉल को तोड़ा गया। जब मस्जिद की बारी आई, तो स्थानीय लोगों ने 4 दिन की मोहलत माँगी, ताकि वे खुद ही इसे हटा सकें। प्रशासन ने मोहलत दे दी और उसी दिन मस्जिद की बाहरी दीवार तोड़ना शुरू कर दिया गया।
अगले दिन शुक्रवार (3 अक्टूबर 2025) को नमाज के बाद कुछ लोगों ने खुद से मस्जिद की बाउंड्री वॉल तोड़ी। उसी दिन मुतव्वली मिंजार हुसैन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जेंट याचिका दायर की, जिसमें मस्जिद को तोड़ने से रोकने की अपील की गई थी।
याचिका पर करीब सवा घंटे सुनवाई हुई, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक, यह मस्जिद करीब 550 वर्ग फीट में बनी हुई थी और पूरी तरह से अवैध कब्जे में थी।

