पत्रकारिता के नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाने वाले राजदीप सरदेसाई को एक बार फिर अपनी गलती का ऐहसास हुआ है। सरदेसाई ने साल 2011 में अपने एक टीवी शो में पूर्व बीजेपी पार्षद अजीत सिंह टोकस पर रिश्वत लेने का आरोप लगाने को लेकर माफी माँगी है। राजदीप ने स्वीकार किया है कि उन्होंने बिना सबूत झूठी खबर टीवी पर प्रसारित की थी।
यह मामला राजदीप सरदेसाई के साल 2011 में IBN7 से जुड़े रहने के दौरान का है। जब सरदेसाई ने टीवी शो ‘दिली के दोहरे एजेंटों’ और ‘IBN7 और कोबरा पोस्ट की जाँच’ में बीजेपी पार्षद को लेकर गलत दावा किया था, जिसकी सच्चाई राजदीप को लगभग डेढ़ दशक बाद पता लगी है।
राजदीप ने दावा किया था कि मुनरिका वार्ड से पूर्व बीजेपी पार्षद अजीत सिंह टोकस ने पार्षद चुने जाने पर क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण के नाम पर पैसे माँगे थे। राजदीप ने यह भी कहा कि लोकायुक्त ने इस स्टिंग ऑपरेशन का संज्ञान खुद लिया था। अब सच्चाई बताते हुए राजदीप कहते हैं कि साल 2012 में दूसरे पक्ष ने रिश्वत लेने की बात को नकार दिया था।
प्रोपेगेंडा पत्रकार ने साल 2011 में बिना किसी सबूतों के बीजेपी पार्षद पर आरोप लगाए थे। ये उन्होंने खुद एक्स पर जारी माफीनामे में कहा- ‘अजीत टोकस पर रिश्वत लेने का कोई प्रमाण रिकॉर्ड में नहीं है।’

माफीनामें में राजदीप सरदेसाई ने लिखा, “टीवी शो के प्रसारण से अजीत सिंह टोकस को हुए सामाजिक एवं राजनीतिक प्रतिष्ठा के नुकसान के लिए माफी चाहता हूँ। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि जाँच एक बाहरी एजेंसी द्वारा की गई थी। हमारा रोल इसमें केवल जाँच के आधार पर आयोजित टीवी शो में एंकरिंग करना था।”
राजदीप सरदेसाई के माफीनामे की सूची
यह पहली बार नहीं है जब राजदीप सरदेसाई ने अपने किसी टीवी शो में गलत तथ्य दिखाने को लेकर माफी माँगी हो। इससे पहले भी राजदीप ने CNN-IBN में ही साल 2008 में IPS राजीव त्रिवेदी पर सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ की घटनाओं को प्रमुख भूमिका निभाने का आरोप लगाया था।
इस मामले में मेट्रोपिलटन मजिस्ट्रेट, हैदराबाद ने राजदीप सरदेसाई और अन्य को अभियुक्त के रूप में मुकदमे का सामना करने के लिए बुलाया। इसके विरोध में राजदीप सरदेसाई ने आंध्र प्रदेश के हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए आदेश को चुनौती दी, जो बाद में सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुँची।
सुप्रीम कोर्ट ने राजदीप की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि व्यक्तिगत प्रतिष्ठा समान रूप से महत्वपूर्ण है और इसे प्रेस की स्वतंत्रता के नाम पर नहीं रौंदा जा सकता। अंत में राजदीप सरदेसाई ने लिखित दस्तावेज में स्वीकार किया कि उनके द्वारा IPS अधिकारी राजीव त्रिवेदी पर झूठे आरोप लगाए गए थे और उन्होंने झूठी खबर का प्रसारण किया था। इस मामले में भी राजदीप ने कोर्ट को माफीनामा दिया था।
इसके अलावा राजदीप सरदेसाई ने साल 2017 में दावा किया था कि BHU के कुलपति वाराणसी में नरेंद्र मोदी की रैली में शामिल हुए थे। हालाँकि, जल्द ही उन्हें यह स्वीकार करने के बाद माफी माँगनी पड़ी कि यह ‘गलत पहचान’ का मामला था।
एक और माफीनामा श्री श्री रविशंकर के एक छेड़छाड़ किए गए साक्षात्कार से संबंधित था। एक दर्शक द्वारा इस संबंध में शिकायत दर्ज कराने के बाद, ‘पत्रकार’ ने दर्शक को जवाब देते हुए खेद व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने ऑन एयर और श्री श्री से व्यक्तिगत रूप से भी माफी माँगी थी। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि चैनल ने “यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की है कि पहले से रिकॉर्ड किए गए साक्षात्कार किसी भी स्तर पर लाइव चर्चाओं में न चलाएँ”।

