लेह में हुए प्रदर्शन का मुख्य चेहरा रहे सोनम वांगचुक को लेह प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सोनम वांगचुक राष्ट्र की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में डालने वाली गतिविधियों में शामिल रहे हैं। लेह प्रशासन ने यह टिप्पणी वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की याचिका के जवाब में की है।
दरअसल, मंगलवार (14 अक्टूबर 2025) को लेह के मजिस्ट्रेट ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। यह हलफनामा वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की उस याचिका के जवाब में था, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत उनके हिरासत वाले आदेश को चुनौती दी थी।
प्रशासन ने कहा कि वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लेने का आदेश पर्याप्त सबूतों के आधार पर ही दिया गया था। प्रशासन ने कहा कि सोनम वांगचुक को सही तरीके से हिरासत में लिया गया है और इस फैसले पर अब भी प्रशासन अड़ा हुआ है।
हलफनामे में लेह मजिस्ट्रेट ने यह भी स्पष्ट किया कि 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने के दौरान भी उन्हें तथ्यों के साथ सूचित किया गया था कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत हिरासत में लिया जा रहा है। साथ ही राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में उनके ट्रांसफर को लेकर भी सूचना दी गई थी। यहाँ तक की वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो को भी तुरंत ही SHO ने इस संबंध में फोन पर जानकारी दी थी।
मजिस्ट्रेट ने कहा कि इसीलिए राष्ट्रीय अधिनियम, 1980 के तहत हिरासत में लेना अवैध नहीं है और वांगचुक की पत्नी की याचिका में कही गईं बातें पूरी तरह से झूठी और भ्रामक हैं।
उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें राजस्थान के जोधपुर जेल में भेज दिया गया। सरकार का आरोप है कि 24 सितंबर को लद्दाख में हुई हिंसक झड़पों, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी, उसमें वांगचुक की भूमिका रही। सरकार का कहना है कि उन्होंने लोगों को उकसाया।

