असम में आर्मी कैंप पर ग्रेनेड हमला और ताबड़तोड़ फायरिंग, 3 जवान घायल: कार्रवाई के बाद हमलावर ट्रक छोड़ भागे, ULFA(I) पर शक

असम के तिनसुकिया जिले के काकोपाथार में गुरुवार (16 अक्तूबर 2025) देर रात सेना कैंप पर ग्रेनेड हमला हुआ। हमले के बाद करीब एक घंटे तक गोलीबारी चली। इस दौरान तीन जवान घायल हुए। घटना के बाद सेना और पुलिस ने इलाके को घेर लिया और सर्च ऑपरेशन शुरू किया। अभी तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन शक ULFA(I) पर है।

आधी रात को गूंजी गोलियों की आवाजें

काकोपाथार आर्मी कैंप के पास रात करीब 12 बजे अचानक तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। इसके बाद गोलियों की आवाजें गूंजने लगीं। लोग डर से अपने घरों में दुबक गए। हमले की खबर मिलते ही सेना ने मोर्चा संभाला। पुलिस ने भी पहुँचकर पूरे इलाके को सील कर दिया।

हमलावरों ने सीधे कैंप के गेट पर ग्रेनेड फेंके। इसके बाद फायरिंग शुरू कर दी। सेना के जवान सतर्क थे। उन्होंने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। लेकिन हमले में तीन जवान घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए तिनसुकिया के मिशनरी अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल सभी की हालत स्थिर है।

हमलावर ट्रक छोड़ भागे

फायरिंग के दौरान हमलावर मौके से फरार हो गए। कुछ घंटे बाद एक ट्रक अरुणाचल प्रदेश के तेंगापानी क्षेत्र में लावारिस हालत में मिला। ट्रक में हथियारों के निशान और ग्रेनेड के टुकड़े बरामद हुए हैं। जाँच एजेंसियाँ अब ट्रक के जरिए हमलावरों की पहचान में जुटी हैं।

शक की सुई ULFA(I) पर

अधिकारियों को शक है कि इस हमले के पीछे उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) यानि ULFA(I) का हाथ हो सकता है। यह संगठन ऊपरी असम में पहले भी इस तरह के हमले कर चुका है। इस गुट का संचालन म्यांमार में बैठे कमांडर परेश बरुआ के हाथ में है। 2023 में भी इसी कैंप पर ऐसा हमला हुआ था। उस केस में NIA ने बरुआ सहित छह लोगों पर चार्जशीट दाखिल की थी।

सेना और पुलिस का संयुक्त तलाशी अभियान अब भी जारी है। आसपास के सभी इलाकों में चौकसी बढ़ा दी गई है। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत जानकारी दें। पुलिस ने कहा कि ट्रक की बरामदगी से जाँच को अहम सुराग मिल सकते हैं।

इस हमले के बाद असम में उग्रवाद को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। खासतौर पर ऊपरी असम के जिलों में हालात संवेदनशील हो गए हैं। इन इलाकों में पहले से ही AFSPA लागू है, जिससे सुरक्षा बलों को अतिरिक्त अधिकार मिले हुए हैं। लेकिन हमले दिखाते हैं कि खतरा अब भी टला नहीं है।