इस्लामी उत्तराधिकार कानून पर SC का बड़ा फैसला: बिना संतान वाली मुस्लिम विधवा को मिला मृत शौहर की संपत्ति में एक-चौथाई हिस्से का हक

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (17 अक्टूबर 2025) को इस्लामी उत्तराधिकार कानून से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी संपत्ति को बेचने का सिर्फ समझौता (एग्रीमेंट टू सेल) मालिकाना हक का हस्तांतरण नहीं करता। यानी जब तक सेल डीड (विक्रय विलेख) अमल में नहीं लाया जाता, संपत्ति का मालिक वही व्यक्ति रहता है जिसके नाम पर वह है।

यह फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्णय के खिलाफ जोहरबी नामक महिला की अपील पर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम कानून के अनुसार, यदि मृतक की औलाद नहीं है तो बीवी संपत्ति के एक-चौथाई हिस्से की हकदार होती है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला चाँद खान नामक व्यक्ति की संपत्ति से जुड़ा था। चाँद खान की मृत्यु हो गई थी और उसकी कोई औलाद नहीं थी। उसकी बीवी जोहरबी ने दावा किया कि चाँद खान की सभी संपत्तियाँ मतरूक संपत्ति (यानि मृत व्यक्ति द्वारा छोड़ी गई संपत्ति) हैं, जिन्हें मुस्लिम कानून के अनुसार बाँटा जाना चाहिए।

वहीं चाँद खान के भाई इमाम खान ने कहा कि ये संपत्तियाँ चाँद खान ने अपने जीवनकाल में ही बिक्री समझौते के जरिए तीसरे पक्ष को बेच दी थीं।

कोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि बिक्री का समझौता मात्र इरादा दिखाता है। इससे न तो खरीदार को मालिकाना हक मिलता है और न ही संपत्ति पर कोई अधिकार।

कोर्ट ने माना कि क्योंकि सेल डीड चाँद खान की मौत के बाद ही बनी, इसलिए संपत्ति उनकी मृत्यु के समय उनके नाम पर ही थी और इस वजह से वह मतरूक संपत्ति मानी जाएगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम कानून के अनुसार, यदि मृतक की औलाद नहीं है, तो बीवी संपत्ति के एक-चौथाई हिस्से की हकदार होती है।

वहीं, अगर संतान है तो बीवी को आठवाँ हिस्सा मिलता है। इस मामले में चाँद खान की कोई औलाद नहीं थी, इसलिए उसकी बेवा केवल एक चौथाई हिस्सेदारी की हकदार थी। शेष हिस्सा अन्य वारिसों में बाँटा गया जिसमें मृतक के भाई भी शामिल थे।