ऑटो ड्राइवर अजीजुल गाजी 60 लोगों के साथ कस्टम इंस्पेक्टर के घर में घुसा, 4 साल की बेटी के सामने बर्बर हमला: TMC से निकले लिंक, 40 मिनट बाद पहुँची पुलिस

कोलकाता के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर इलाके में 23 अक्तूबर 2025 की शाम को एक चौंकाने वाली घटना हुई। ऑटो चालक अजीजुल गाजी 50 से 60 इस्लामी भीड़ लेकर एक अपार्टमेंट में घुस गया। इस्लामी भीड़ ने चौथी मंजिल पर रहने वाले कस्टम इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार के फ्लैट का दरवाजा तोड़ दिया। अंदर घुसकर उन्होंने प्रदीप कुमार और उनकी पत्नी पर हमला किया।

यह सारी घटना इस्पेंक्टर की 4 साल की बेटी के सामने हुई। हमलावरों ने प्रदीप कुमार के घर में भी तोड़फोड़ की। प्रदीप कुमार एक साल पहले ही इस घर में रहने आए थे। यह पूरी घटना CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है।

दरअसल, काली पूजा विसर्जन के लिए एक जुलूस निकल रहा था। जब प्रदीप कुमार अपनी SUV कार को जुलूस के बीच से निकालने की कोशिश कर रहे थे, तो उनकी कार ने ऑटो-रिक्शा को टक्कर मार दी। इसी मामूली टक्कर के कारण दोनों पक्षों के बीच पहले बहस हुई थी, जो बाद में हमले में बदल गई। इस हमले के दौरान, पीड़ित प्रदीप कुमार और अपार्टमेंट के अन्य निवासियों ने तुरंत सोनारपुर पुलिस स्टेशन को कई बार फोन किए।

हालाँकि, पुलिस अधिकारी काली पूजा विसर्जन की व्यवस्था में लगे होने के कारण तुरंत मौके पर नहीं पहुँच पाए। जब पुलिस लगभग चालीस मिनट बाद घटनास्थल पर पहुँची, तब तक हमलावर वहाँ से भाग चुके थे। प्रदीप कुमार ने हमले के भयानक अनुभव को बताते हुए कहा, “जब हमला लगातार हो रहा था तो हमें लगा कि हमारा अंत करीब है। उन्होंने लोहे की ग्रिल और ताला तोड़ दिया और मुझे बुरी तरह पीटा। हमलावरों ने मेरे सिर पर भी मारा और मेरी पत्नी को धक्का दिया।” प्रदीप कुमार ने बताया कि इस हमले में उन्हें माथे, गर्दन और ठोड़ी पर चोटें आई हैं।

कस्टम इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार को उनके सहकर्मी और पश्चिम बंगाल बीजेपी नेताओं ने इलाज के लिए कल्याणी एम्स में भर्ती कराया। घायल प्रदीप कुमार ने घटना पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, “पुलिस को मामले की जाँच करनी चाहिए। अगर आम आदमी ही सुरक्षित नहीं है, तो फिर क्या फायदा?” पुलिस के मुताबिक, इस मामले में कस्टम अधिकारी प्रदीप कुमार और ऑटो चालक अजीज़ुल गाजी दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

ऑटो चालक गाजी का कहना है कि प्रदीप कुमार ने उससे पैसे ऐंठने की कोशिश की और उसे पीटा था। प्रदीप कुमार के घर पर हमला और मारपीट हुई थी। एक चश्मदीद गवाह ने बताया कि ऑटो चालक गाजी और उसके साथी प्रदीप कुमार का पीछा करते हुए हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के गेट तक आए और रास्ते भर उनकी गाड़ी पर हमला करते रहे। हालाँकि, हमलावरों द्वारा गेट को ब्लॉक करने के बावजूद, कुमार अपनी गाड़ी अंदर ले जाने में कामयाब रहे।

रेजिडेंट्स एसोसिएशन ‘दीशारी मेगासिटी’ के उपाध्यक्ष गोरा बोस ने बताया कि अपार्टमेंट के गेट पर लगभग 200 लोग जमा हो गए थे। उन्होंने कहा कि उनके दोनों गार्ड कुछ नहीं कर पाए। बोस ने खुलासा किया कि लगभग 50 लोग गेट पर चढ़कर सीधे कुमार के फ्लैट की तरफ भागे। उपाध्यक्ष गोरा बोस ने बताया, “हम सब वहीं गेट पर थे। अंदर जाते समय उन्होंने हमें भी धक्का दिया।” इस मामले में पुलिस ने 24 अक्तूबर 2025 को ऑटो चालक अजीज़ुल गाजी को हिरासत में लिया था। गाजी पर डकैती, गंभीर चोट पहुँचाना, शरारत, अतिक्रमण और गलत तरीके से रोकना जैसे आरोप लगाए गए थे, लेकिन ये सभी जमानती अपराध थे और वह अगले ही दिन रिहा हो गया।

इसी तरह के आरोप तीन अन्य लोगों पर भी लगाए गए थे, जिनमें एक और ऑटो-चालक आजाद अली मंडल शामिल था। उन्हें 26 अक्तूबर 2025 को हिरासत में लिया गया, लेकिन वे भी कुछ ही घंटों में जेल से बाहर आ गए।

बीजेपी नेता का TMC पर आरोप

बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी घायल कस्टम इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार से मुलाकात की और उन्हें मदद का भरोसा दिया। अधिकारी ने हमलावरों को ‘टीएमसी के गुंडे’ बताते हुए आरोप लगाया कि ऑटो चालक गाजी सोनारपुर उत्तर से TMC विधायक फिरदौसी बेगम के शौहर नजरूल अली का करीबी सहयोगी है। बीजेपी नेता ने कहा कि गाजी ने 200 TMC कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स के मुख्य गेट के बाहर इस्लामी भीड़ जमा की थी।

बाद में 50 से ज्यादा गुंडों ने जबरन गेट तोड़कर सोसाइटी में प्रवेश किया, अधिकारी के फ्लैट में घुसकर उन्हें बुरी तरह पीटा, उनके सिर पर चोट पहुँचाई, उनके परिवार के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार किया और उनके घर में तोड़फोड़ की। शुभेंदु अधिकारी ने यह भी जोर देकर कहा कि इस पूरी घटना के दौरान प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई।

बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “अगर एक केंद्र सरकार का सेवारत अधिकारी, जो एक सुरक्षित गेट वाले कॉम्प्लेक्स में रहता है, उस पर भी खुलेआम हमला हो सकता है, तो पश्चिम बंगाल में अब कोई सुरक्षित नहीं है।” बीजेपी नेता ने घोषणा की कि ममता बनर्जी के शासन में ‘कोई कानून नहीं, कोई व्यवस्था नहीं, सिर्फ TMC का गुंडाराज है। यह जंगलराज खत्म होना चाहिए।’

वहीं, एक अन्य बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल ने TMC की वोट बैंक की राजनीति का जिक्र करते हुए सवाल किया कि ‘क्या माननीय मुख्यमंत्री ने राज्य की कानून व्यवस्था इन ‘दूधारू गायों’ के हवाले कर दी है?’ अग्निमित्रा पॉल ने लिखा कि ऑटो चालक गाजी को सोनारपुर उत्तर की विधायक फिरदौसी बेगम के शौहर नजरूल अली का अत्यंत करीबी माना जाता है और उन्होंने यह भी जोड़ा कि ‘सभी हमलावर तृणमूल कॉन्ग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता हैं।’

बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल ने इस मामले में पुलिस की देरी पर सवाल उठाते हुए पूछा, “तो क्या यह सच है कि हमलावरों के राजनीतिक कनेक्शन के कारण ही पुलिस तुरंत कार्रवाई करने से डर रही थी?” उन्होंने सीएम ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए आगे पूछा, “माननीय मुख्यमंत्री और कितना नीचे गिरेंगी? और कितना?” पॉल ने जोर देकर कहा कि हमलावरों के सत्ताधारी पार्टी से जुड़े होने के कारण ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, जिससे राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

घटना कैसे हुई?

करीब रात 9:50 बजे, हमलावर द्वारिर रोड पर सदर्न बाईपास के पास स्थित अपार्टमेंट के गेट पर पहुँचे। इस्लामी भीड़ ने गेट पर मौजूद दोनों गार्डों को तुरंत काबू कर लिया। इसके बाद, इस्लामी भीड़ लगभग 350 मीटर दौड़कर गेट से टावर 11 तक पहुँची और वहाँ दो समूहों में बँट गई। एक समूह ने लिफ्ट का इस्तेमाल किया, जबकि दूसरा समूह सीढ़ियों से ऊपर गया।

इस्लामी भीड़ ने फ्लैट 4B का लकड़ी का दरवाज़ा तोड़ दिया, लोहे की जालीदार गेट को फाड़ दिया और जबरन अंदर घुस गए। जब कुमार की पत्नी ने उन्हें बचाने की कोशिश की तो हमलावरों ने उन्हें धक्का दिया और लगातार इंस्पेक्टर कुमार के चेहरे और सिर पर वार किए।

प्रदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने सोनारपुर पुलिस स्टेशन को दो बार फोन करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बताया गया कि पुलिसकर्मी ‘काली पूजा विसर्जन ड्यूटी’ पर हैं। जब कॉम्प्लेक्स से करीब 6 किलोमीटर दूर स्थित इस पुलिस स्टेशन पर अन्य निवासियों ने भी फोन किया, तो उन्हें भी यही जवाब मिला।