‘आखिरी मिनट में मिली वोटर लिस्ट’: हरियाणा चुनाव को लेकर राहुल गाँधी ने फिर किया ‘फर्जी दावा’, चुनाव आयोग ने खोली पोल

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने एक बार फिर ‘वोट चोरी’ को लेकर लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। कथित हाईड्रोजन बम के नाम पर राहुल गाँधी ने ‘H-फाइल्स’ नाम से जो कथित डॉक्यूमेंट जारी किया उसमें खुद कई गड़बड़ियाँ हैं। इतना ही नहीं हरियाणा में 25 लाख वोट चोरी का दावा करने वाले राहुल गाँधी ने राजनीतिक दलों को वोटर लिस्ट मिलने को लेकर भी झूठ फैलाया है।

राहुल गाँधी ने क्या कहा?

राहुल गाँधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए दावा किया कि राजनीतिक दलों को वोटर लिस्ट मिलने में अक्सर देरी हो जाती है। पत्रकार ने राहुल गाँधी से सवाल किया कि ‘अब चुनावी राज्यों में SIR होने जा रहा है तो वहाँ वोट चोरी रोकने के लिए आपकी क्या तैयारी है’ इस पर राहुल गाँधी ने कहा कि बूथ लेवल पर हम थोड़ा काम कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “सबसे पहले आपको यह समझना है कि वोटर लिस्ट पर मिलती है।” हरियाणा की वोटर लिस्ट को लेकर उन्होंने आगे कहा, “ये जो हरियाणा की वोटर लिस्ट थी, लास्ट मिनट, चुनाव से एकदम पहले हमें दी जाती है, फाइनल लिस्ट।” इस दावे के बाद राहुल गाँधी ने अपने तर्क दिए।

चुनाव आयोग ने दिया जवाब

राहुल गाँधी के इस दावे पर चुनाव आयोग ने जवाब दिया है। हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने 2024 के हरियाणा चुनाव को लेकर फैक्ट शीट जारी की है। चुनाव आयोग के इस फैक्ट शीट से राहुल गाँधी का दावा फुस्स साबित हुआ है।

हरियाणा की सभी 90 विधानसभा सीटों पर 5 अक्टूबर 2024 को मतदान हुआ था। राहुल का दावा है कि इससे एकदम पहले उन्हें वोटर लिस्ट दी गई लेकिन चुनाव आयोग की फैक्ट शीट दूसरी ही कहानी बता रही है।

हरियाणा के CEO के द्वारा जारी फैक्ट शीट के मुताबिक, 2 अगस्त 2024 को राजनीतिक दलों के साथ ‘ड्राफ्ट मतदाता सूची’ जारी कर दी गई थी। यानी चुनाव से करीब 2 महीने पहले ही कॉन्ग्रेस और अन्य दलों के पास ‘ड्राफ्ट मतदाता सूची’ आ गई थी।

बात यही खत्म नहीं हुई, इसके बाद ड्राफ्ट सूची में आपत्तियों को ठीक किया गया और 27 अगस्त 2024 को फाइनल मतदाता सूची भी जारी कर दी गई। यह सूची राजनीतिक दलों के साथ भी शेयर की गई थी। यानी चुनाव होने में करीब 40 दिन बाकी थे।

यानी राहुल गाँधी का यह दावा कि उन्हें आखिरी वक्त पर वोटिंग लिस्ट दी गई थी वो तथ्यों के आगे कहीं नहीं टिकता है। चुनाव आयोग ने इसके बाद जो बताया है वो और भी महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग ने दावा किया है कि अंतिम मतदाता सूची के बाद DM के पास एक भी अपील फाइल नहीं की गई थी। जाहिर है कि कॉन्ग्रेस के पास अपने एजेंट हर बूथ स्तर पर होंगे और ऐसे में भी तब उनके द्वारा कोई आपत्ति DM के पास फाइल नहीं की गई थी।