महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़े एक बड़े जमीन घोटाले को लेकर राजनीतिक भूचाल आ गया है। पुणे के सबसे पॉश इलाके कोरेगाँव पार्क में करीब ₹1800 करोड़ की सरकारी जमीन को मात्र ₹300 करोड़ में बेचने के मामले में अब तक दो FIR दर्ज की जा चुकी हैं और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
पुणे के मुंधवा इलाके में 43 एकड़ की यह विवादित जमीन पहले ‘मुंबई सरकार’ के नाम दर्ज थी और इसे इंडियन बॉटनिकल सर्वे को 2038 तक के लिए ₹1 प्रति वर्ष के किराए पर लीज (पट्टे) पर दिया गया था।
आरोप है कि ₹1800 करोड़ की इस महँगी जमीन को अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी (Amadea Enterprises LLP) नामक कंपनी को मात्र ₹300 करोड़ में बेच दिया गया। इस कंपनी में अजित पवार के बेटे पार्थ पवार भागीदार हैं।
?#BREAKING | पुणे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी 'अमेडिया होल्डिंग्स LLP' पर दो ज़मीन घोटालों में अलग-अलग FIR दर्ज हुई हैं। पहला मामला कोरेगांव पार्क/मुंढवा की ₹1800 करोड़ की जमीन को ₹300 करोड़ में खरीदने और स्टैंप ड्यूटी में छूट से जुड़ा है, जबकि… pic.twitter.com/ZJUlt4885e
— NDTV India (@ndtvindia) November 7, 2025
जमीन बेचने वाली शीतल तेजवानी ने 272 लोगों की ओर से ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ का इस्तेमाल कर यह डील की। जाँच में सामने आया कि निलंबित तहसीलदार सूर्यकांत येवले ने गलत तरीके से सरकारी जमीन को पाँच निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया, जिसके बाद शीतल तेजवानी ने यह सेल डीड (बिक्री दस्तावेज) तैयार कर दी।
पूर्व उप-पंजीयक रवींद्र तारू ने बिना किसी जरूरी सरकारी अनुमति (NOC) के यह सौदा रजिस्टर्ड कर दिया। हैरानी की बात यह है कि ₹1800 करोड़ की जमीन का पंजीकरण केवल ₹500 के स्टाम्प पेपर पर किया गया। इस सौदे में करीब ₹6 करोड़ के सरकारी कर (स्टाम्प ड्यूटी, LBT, मेट्रो टैक्स) की भी चोरी की गई।

यह भी सामने आया है कि जमीन मूल रूप से दलितों के लिए आरक्षित थी, लेकिन नियमों का उल्लंघन कर इसे निजी कंपनी को सौंप दिया गया।
तेज कार्रवाई और चार गिरफ्तार
पुणे के जिलाधिकारी जितेंद्र दूड़ी ने बताया कि अनियमितताओं की एक अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस कार्रवाई शुरू हुई है। पार्थ पवार के बिजनेस पार्टनर दिग्विजय पाटिल, जमीन विक्रेता शीतल तेजवानी और उप-पंजीयक रविंद्र तारू पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ। दूसरी FIR में बाद में सस्पेंड तहसीलदार सूर्यकांत येवले का नाम भी जोड़ दिया गया।
यह मामला पुणे के खडक पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है, जिसे अब राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दिया गया है। जाँच समिति अब सभी दस्तावेजों और विभागीय संचार की समीक्षा कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कम कीमत पर यह सौदा कैसे मंज़ूर हुआ और इसमें किसने भूमिका निभाई।
CM फडणवीस का सख्त रुख
यह मामला सामने आते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत उच्च-स्तरीय जाँच के आदेश दिए। उन्होंने तहसीलदार सूर्यकांत येवले और उप-पंजीयक रवींद्र तारू को निलंबित कर दिया।
मुख्यमंत्री ने अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खारगे की अध्यक्षता में एक विशेष जाँच समिति भी गठित की है, जो सभी दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा करेगी। फडणवीस ने दोहराया कि अनियमितता में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
अजित पवार ने सौदा रद्द किया
पूरे विवाद के बीच, शुक्रवार (7 नवंबर 2025) को डिप्टी सीएम अजित पवार ने मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात की। इस एक घंटे की बैठक के बाद, अजित पवार ने घोषणा की कि विवादित जमीन सौदा तुरंत रद्द कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी (Amadea Enterprises LLP), जिसमें उनके बेटे भागीदार हैं, वह जमीन सरकार को वापस लौटाएगी। अजित पवार ने जाँच में पूरा सहयोग करने का आश्वासन दिया और कहा कि वह चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए। जाँच समिति एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

