बंगाल की शुभेंदु सरकार ने बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को दिया तोहफा, पेंशन में की 50% की बढ़ोतरी: 1 अगस्त से खातों में आएगी बढ़ी हुई रकम

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए एक बड़ा और कल्याणकारी फैसला लिया है। सरकार ने वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांगता पेंशन की राशि में सीधी बढ़ोतरी कर दी है। इसके तहत अब लाभार्थियों को हर महीने 1,000 रुपए के स्थान पर 1,500 रुपए की पेंशन राशि दी जाएगी।

भारतीय जनता पार्टी के ‘संकल्प पत्र’ में किए गए वादे के अनुसार, 1 अगस्त से सभी पात्र लाभार्थियों को यह बढ़ी हुई पेंशन मिलना शुरू हो जाएगी। पूर्व में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार के कार्यकाल में यह राशि 1,000 रुपए प्रति माह हुआ करती थी।

1 अप्रैल से लागू मानी जाएगी बढ़ी हुई राशि

पश्चिम बंगाल पंचायत मामलों और ग्रामीण विकास विभाग ने नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम (NSAP) के तहत संचालित तीन मुख्य पेंशन योजनाओं के लिए इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि पेंशन में यह 500 रुपए प्रति माह की बढ़ोतरी 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएगी।

इस बढ़ोतरी का लाभ इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना और इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना के पात्र लाभार्थियों को मिलेगा। सभी लाभार्थियों के खातों में बढ़ा हुआ पैसा पहले की तरह ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रक्रिया के जरिए सीधे ट्रांसफर किया जाएगा।

बजट में स्वपन दासगुप्ता ने रखा था प्रस्ताव

पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के राज्य बजट प्रस्तावों में बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए पेंशन में 500 रुपए की वृद्धि का ऐलान किया था। उन्होंने पिछले महीने विधानसभा में यह बजट पेश किया था, जिसके बाद अब संबंधित विभाग ने इसे औपचारिक रूप से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।

राज्य सरकार के अनुसार, इस बढ़ी हुई पेंशन का अतिरिक्त वित्तीय भार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पंचायत मामलों और ग्रामीण विकास विभाग के बजट आवंटन से वहन किया जाएगा।

जिलाधिकारियों और एजेंसियों को तेजी से काम करने के निर्देश

योजना को धरातल पर जल्द से जल्द और पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए राज्य प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेटों (DMs), जिला पंचायत एवं ग्रामीण विकास अधिकारियों, कार्यान्वयन एजेंसियों और राज्य शहरी विकास एजेंसी को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि तय समयसीमा के भीतर सभी पात्र लोगों तक बढ़ा हुआ लाभ पहुँच सके।