‘संघ ने समाज को दोबारा उसकी जड़ों से जोड़ा’: कमला नेहरू कॉलेज के वार्षिक युवा सम्मेलन में दिखा संस्कृति का अद्भुत संगम, RSS के 100 साल पर हुआ ‘विमर्श’

दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज परिसर में वार्षिक युवा सम्मेलन ‘विमर्श 2025’ में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। आयोजन में ‘सेवा और राष्ट्र निर्माण के 100 वर्ष: आत्मनिर्भर भारत की ओर’ सत्र भी आयोजित किया गया।

युवा संगठन की ओर से आयोजित इस वार्षिक युवा सम्मेलन के दूसरे दिन के सत्र में मुख्य अतिथि मुकुंद बिहारी ने कहा कि अंग्रेजों ने न केवल हमारी शिक्षा और अर्थव्यवस्था को क्षति पहुँचाई, बल्कि हमें हमारी सांस्कृतिक पहचान से भी दूर करने का प्रयास किया। संघ ने समाज को पुनः उसकी जड़ों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में व्यक्ति और समाज विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सहयोगी हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक रतन शारदा ने अपने संबोधन में कहा कि संघ की स्थापना से लेकर आज तक संगठन ने राष्ट्र निर्माण में असाधारण योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि 1965 के युद्ध से लेकर कोविड-19 वैक्सीन निर्माण तक भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में काफी प्रगति की है।

रतन शारदा ने आगे कहा कि भारत को अब विश्व में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना वाले मित्र राष्ट्र के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा, “राम मंदिर आंदोलन केवल मंदिर निर्माण का आंदोलन नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों के एक होने का आंदोलन था।”

आयोजन में उपस्थित ऑपइंडिया के CEO राहुल रौशन ने अपने वक्तव्य में कहा कि लंबे समय तक मीडिया में एक ही विचारधारा का वर्चस्व रहा, लेकिन अब वैचारिक विविधता का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा, “पहले हिंदुओं के खिलाफ अपराधों को रिपोर्ट नहीं किया जाता था, अब उन्हें भी समान गंभीरता से देखा जा रहा है।”

उन्होंने राष्ट्रवाद की भारतीय अवधारणा पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत पश्चिमी देशों के ‘संवैधानिक राष्ट्रवाद’ से अलग अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों से प्रेरित राष्ट्रवाद को आगे बढ़ा सकता है। राहुल रौशन ने कहा, “आज के युवा को अपने तर्क और दृष्टिकोण के साथ राष्ट्रहित में खड़ा होना चाहिए। यदि हम स्वयं बदलेंगे, तो राष्ट्र बदलेगा। यदि हम सोचेंगे, तो राष्ट्र सोचेगा।”

‘विमर्श 2025’ का दूसरा दिन का सार रहा कि भारत की युवा शक्ति केवल भविष्य की आशा नहीं, बल्कि वर्तमान परिवर्तन की धुरी है।