ब्रिटेन में दशकों से चले ग्रूमिंग गैंग स्कैंडल की परतें अब एक-एक कर उठ रही हैं। रोजाना नए खुलासे और पीड़ितों की झकझोर देने वाली गवाहियाँ, कोर्ट की कार्यवाही और यहाँ तक कि ब्रिटेन की संसद में इस स्कैंडल को लेकर होने वाली बहस भी लोगों के लिए एक कौतूहल और सच्चाई जानने का आईना बनती जा रही है।
पीड़ितों की गवाहियों में उनके साथ होने वाले रेप की भयावह दास्तान जहाँ रोंगटे खड़े दे रही है वहीं पुलिस अधिकारियों का भी पीड़ितों के साथ दुष्कर्म करने और नस्लीय आधार पर ब्रिटिश लड़कियों को निशाना बनाने के तरीकों के बारे में खुलकर बात की जा रही है।
ब्रिटेन के ग्रेट यारमाउथ से सांसद रूपर्ट लोव ने भरी संसद में कई लड़कियों की गवाहियाँ पढ़ीं। उन्होंने बताया कि किस तरह से लाखों लड़कियों ने कई वर्षों तक अत्याचार झेला और बार-बार पुलिस और प्रशासन के दरवाजे खटखटाए। इसके बावजूद उनकी शिकायतों को प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया। इसकी वजह से ग्रूमिंग गैंग का मामला इतने बड़े स्तर पर फल-फूल कर हजारों लड़कियों की जिंदगियाँ तबाह करता रहा।
ब्रिटिश नेशनलिटी एक्ट – 1948 के बाद बड़े पैमाने पर इमिग्रेशन शुरू हुआ और इसके लगभग साथ ही ऐसे मामले सामने आने लगे। पहला दर्ज मामला 1955 का है, जब ब्रैडफोर्ड में चार पाकिस्तानी पुरुषों पर एक 15 वर्षीय लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा।
इंडिपेंडेंट इंक्वायरी इनटू चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज यानी IICSA की रिपोर्ट के अनुसार, 1970 के दशक तक यह प्रवृत्ति एक सोची-समझी साजिश का रूप ले चुकी थी। 1997 के बाद इमिग्रेशन की नई लहर ने इस नेटवर्क को और विस्तार दिया और इसके साथ ही शोषण के मामलों की संख्या भी तेजी से बढ़ने लगी। अपराधियों में ज्यादातर पाकिस्तान से आए मुस्लिम पुरुष थे।
जाँच में यह भी सामने आया कि 87% अपराधी पाकिस्तानी मुस्लिम पुरुष थे जो टैक्सी चालक, रेस्तराँ मालिक, केयर होम कर्मचारी या अन्य ऐसी भूमिकाओं में थे जहाँ कमजोर लड़कियों तक उनकी आसान पहुँच थी।
उन्होंने टैक्सी, होटल, घरों और कुछ अन्य जगहों पर लड़कियों को ले जाकर उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। उन्हें सिगरेट से जलाया, उनके प्राइवेट पार्ट में बोतल फोड़ी, ब्लैकमेल किया, एक शहर से दूसरे शहर में तस्करी की और पीड़िताओं का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया।
ग्रूमिंग गैंग क्या होते हैं
ग्रूमिंग गैंग उस संगठित आपराधिक नेटवर्क को कहा जा सकता है, जिसमें नाबालिग या कमजोर स्थिति की लड़कियों को पहले अपने झाँसे में फँसाया जाता है। फिर उन्हें उपहार, झूठे प्रेम, नशे, धमकी या सामाजिक दबाव में लाया जाता है। इसके बाद उनका यौन शोषण किया जाता है।
यह एक ऐसी प्रणाली थी जो वर्षों की आजमाइश के बाद ईजाद की गई थी। सबसे दुखद यह है कि जब-जब संकेत मिले जिनमें लड़कियों का गायब होना, संदिग्ध पुरुषों का स्कूलों के बाहर मंडराना, कम उम्र की लड़कियों का बड़े पुरुषों के साथ दिखना जैसी बातें शामिल रहीं, तब-तब पुलिस और प्रशासन ने इसे ‘सांस्कृतिक संवेदनशीलता’ के नाम पर दरकिनार कर दिया। दशकों तक यही होता रहा।
ब्रिटेन के रॉदरहैम मामले में आधिकारिक जाँच ने 1997 से 2013 के बीच कम-से-कम 1,400 बच्चों के शोषण का अनुमान दर्ज किया था और इसमें प्रशासनिक विफलता भी सामने आई।
लाखों पीड़िताएँ और ग्रूमिंग गैंग का नेटवर्क
इस पूरे मामले में कम से कम 2,50,000 युवा लड़कियाँ ग्रूमिंग गैंग का शिकार बनीं। 87% अपराधियों में पाकिस्तानी मुस्लिम शामिल थे। ब्रिटेन के 149 जिलों में ग्रूमिंग गैंग ने लड़कियों को निशाना बनाया। इनमें रॉदरहैम में 1400+, टेल्फोर्ड में 1000+ पीड़ित समेत कई अन्य जिलों से लड़कियाँ शामिल थीं।
ब्रिटेन में जब इस तरह के मामले सामने आए तो शुरुआत में सरकार ने भी इन मामलों को नजरअंदाज कर दिया। कई संस्थाओं ने इस सामुदायिक सद्भाव का नाम देकर पूरी सच्चाई छुप दी और इसी की वजह से हजारों जिंदगियां खराब हुई, कई परिवार टूटे और लोगों का पुलिस और प्रशासन से भरोसा खत्म हो गया।
रूपर्ट लोव के अनुसार, जिन लड़कियों के साथ ज्यादतियाँ हुई है, उनमें एक ऐसी पीड़िता भी थी जिसके अब्बा इमाम थे। उस पीड़िता ने बताया कि उसके साथ 600 से 700 पुरुषों ने बार-बार रेप किया।
उसके अलावा एक अन्य पीड़िता जब 12 साल की थी, तब उसके प्राइवेट पार्ट में शराब की बोतल डालकर फोड़ दी गई और नस्लीय टिप्पणियों के ताने दिए गए। उन टिप्पणियों में यह बात शामिल थी कि ‘गोरी लड़कियों के संस्कार मुस्लिम लड़कियों से कम होते हैं।’
भारत में ग्रूमिंग गैंग से कम नहीं लव जिहाद के मामले
ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग के जैसे मामले भारत में भी कई वर्षों से सामने आते रहे हैं।भारत में हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए अलग-अलग पैटर्न अपनाए जा रहे हैं। इसमें 1992 का अजमेर का सेक्स स्कैंडल मामला था। इसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में स्कूली छात्राओं को निशाना बनाया गया। उन्हें भरोसे में लिया गया, उनके साथ सम्बन्ध बनाए गए। फिर उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें लेकर ब्लैकमेल कर उनका शोषण किया गया। इस मामले में 32 साल बाद, 2024 में जयपुर की पोक्सो अदालत में 6 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अजमेर ही एकलौता ऐसा मामला नहीं है, बल्कि भारत में बीते वर्षों में मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और उत्तर प्रदेश के भी कई शहरों से ऐसे नेटवर्क सामने आ चुके हैं जिनमें मुस्लिम आरोपितों ने कॉलेज की छात्राओं को अपने प्रेम जाल में फँसाया, उन्हें ड्रग्स दिए और उनके अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल और धर्मांतरण के लिए मजबूर किया।
उत्तर प्रदेश के कुछ मामलों में तो आरोपियों ने झूठी हिंदू पहचान अपनाकर लड़कियों का विश्वास जीता। ‘राम’, ‘सुनील’ या ‘विक्की’ जैसे हिंदू नाम रखे, नौकरी और शादी के सपने दिखाए और जब लड़की पूरी तरह उनके जाल में आ गई, तब असली चेहरा सामने आया। दुष्कर्म, ब्लैकमेल और मतांतरण का वही पुराना तंत्र देखने को मिला।
कहाँ क्या मामले देखने को मिले
शुरूआत अगर मध्यप्रदेश के भोपाल वाले मामले से करें तो इस केस का खुलासा जुलाई 2025 में हुआ। एक ड्रग गैंग चलाने वाले यासीन मछली और शाहवर मछली की गिरफ्तारी हुई। छानबीन में पता चला कि इनका मकसद सिर्फ ड्रग्स की तस्करी करना नहीं था बल्कि इनके निशाने पर हिंदू लड़कियाँ थीं। ये लोग ये लोग हिंदू युवतियों को एमडी (MD) ड्रग देकर शारीरिक शोषण करते थे और उनसे ड्रग भी बिकवाते थे। इनका मकसद लड़कियों को बर्बाद करते हुए धर्मांतरण करवाना था ताकि उनके पास और कोई विकल्प न बचे।
भोपाल और इंदौर से ऐसी ही एक मुस्लिम गैंग का खुलासा हुआ था। गैंग का मास्टरमाइंड फरहान था। इस गैंग ने निजी कॉलेज में पढ़ने वाली हिंदू लड़कियों को निशाने पर लिया हुआ था। पीड़िताएँ इस मामले में लंबे समय तक चुप थीं, लेकिन बाद में जब एक मामला सामने आया तो एक-एक करके कई लड़कियाँ सामने आईं। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें नशा देकर उनसे बलात्कार होता था और इसके बाद उनपर धर्मांतरण का दबाव बनाया जाता था।
इसी तरह का मामला नैनीताल से भी जुलाई में ही सामने आया था। यहाँ 11 वीं क्लास की हिंदू युवती को 30 साल के मुस्लिम युवक ने प्रेम जाल में फँसा रखा था। लड़की का परिवार इतना बेबस था कि उन्हें मदद के लिए हिंदू संगठनों का सहारा लेना पड़ा। परिवार ने गिड़गिड़ा कर बताया कि उनकी बेटी को नशा दिया जाता है, उसे लत लगवा दी गई है। घरवाले इसलिए मजबूर हो गए हैं क्योंकि बेटी परिवार के विरोध पर उतर आई है।
इंदौर के मूसाखेड़ी में भी जीशान खान ने ‘अभिषेक ठाकुर’ बनकर हिंदू युवती को फँसाया हुआ था। उसने लड़की को अपने जाल में उलझाए रखने के लिए उसको ड्रग्स की लत लगाई, फिर उसका यौन शोषण किया और उसे ब्लैकमेल करके उसपर धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा।
एक अन्य मामला इंदौर से ही सामने आया। यहाँ सुल्तान रोशन नागोरी ने कोचिंग सेंटर में जाने वाली हिंदू युवतियों को टारगेट करता था। पोल तब खुली जब एक ब्राह्मण लड़की पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुँची। युवती ने बताया कि सुल्तान ने उसके साथ शारीरिक शोषण तो किया ही था। साथ में उसे अश्लील फोटो-वीडियो वायरल की धमकी देकर धर्म परिवर्तन का दबाव भी बना रहा था।
इस मामले में पीड़िता ने कॉल सेंटर्स में एक्टिव धर्मांतरण सेल का भी खुलासा किया था। उसका दावा था कि इस सेल में हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मुस्लिम लड़कों को रखा जाता था। उनका ब्रेनवॉश ये कहकर होता था कि अल्लाह ने तुम्हें हमारे लिए बनाया है। बाद में उन लड़कियों को नशे का आदी बनाया जाता था और उनका शारीरिक शोषण होता था।
यूपी के मैनपुरी में एक दिन एक 17 साल की लड़की अपने घर से अचानक गायब हो गई। घरवालों ने परेशान होकर पुलिस में शिकायत दी। छानबीन हुई तो पता चला कि वो इंस्टाग्राम पर एक मुस्लिम लड़के से बात करती थी। लड़के का नाम अब्दुल्ला था। उसी ने उसे अगवा किया है। पुलिस जहा इसके बाद अब्दुल्ला और लड़की की तलाश में जुटी। वहीं परिवार केवल ये सोचता रहा कि उनकी बेटी के साथ ये सब कैसे हुआ।
बिहार में अंडा बेचने वाले सलमान ने एक मध्य प्रदेश में रहने वाली हिंदू युवती को पबजी खेलने के दौरान हिंदू नाम से प्रेम जाल में फँसाया। लड़की प्रेम में इतना पागल हुई कि वो अपना घर-बार छोड़कर मधुबनी आ गई। यहाँ उसे सलमान ने अपनी असली पहचान बताई। फिर उसे जबरन कलमा पढ़वाकर उसे निकाह किया। लड़की के साथ हुए इस धोखे का खुलासा उस समय हुआ जब लड़की के पिता की शिकायत पर पुलिस ने उसका इंस्टा जाँचा और सामने आया कि वो किसी सलमान के चक्कर में पड़ी हुई थी।
इसी साल मार्च में सामने आए महाराष्ट्र के नासिक में TCS के दफ्तर में हिंदू महिलाओं के यौन शोषण और जबरन धर्म परिवर्तन की कोशिश का मामले में आरोपितों में दानिश शेख, तौफिक अत्तार के साथ निदा खान नाम की ख्वातीन भी शामिल थी। वह लड़कियों को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर धर्म से जुड़ी बातें बताती थी। निदा लड़कियों को मुस्लिम मजहब के रीति-रिवाज अपनाने के लिए प्रेरित करती थी और उन्हें नमाज पढ़ने से लेकर बुर्का पहनने तक की जानकारी और ट्रेनिंग देती थी। मामले की जाँच में हिंदू पीड़िता के फोन से इस्लाम से जुड़े 37 ऑडियो क्लिप और 4 मजहबी ऐप्स भी मिले।
एक व्यक्ति नहीं, पूरा नेटवर्क करता है काम
ब्रिटेन हो या भारत- इन मामलों को समझने के लिए इनके तंत्र को समझना जरूरी है। सतह पर एक आरोपी दिखता है, लेकिन असल में एक पूरा नेटवर्क काम कर रहा होता है। कोई लड़की की पहचान करता है। कौन सी लड़की घर में अकेली है, किसके माता-पिता का झगड़ा है, कौन भावनात्मक रूप से कमजोर है।
इसी तरह कोई अन्य उससे दोस्ती या प्रेम संबंध बनाता है, इसके बाद कोई आर्थिक मदद या सुरक्षा का भ्रम पैदा करता है, कोई वीडियो या फोटो बनाकर ब्लैकमेल करता है और फिर कोई दूसरा व्यक्ति आगे शोषण या दबाव की कड़ी संभालता है ।
अजमेर कांड की रिपोर्टिंग में भी यह सामने आया कि एक पीड़िता को अगली पीड़िता तक पहुँचने के माध्यम की तरह इस्तेमाल किया गया। ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग्स में भी लड़कियों को शराब, नशा, उपहार, वाहन, ठिकाने और भावनात्मक नियंत्रण के जरिए गैंग के भीतर घुमाया जाता था। यही कारण है कि ऐसे मामलों को केवल ‘लड़का-लड़की का निजी मामला’ कहकर टाल देना कई बार गंभीर भूल साबित हो सकता है ।
मध्य प्रदेश में लव जिहाद को लेकर कुछ रिपोर्टों में 283 मामलों का उल्लेख किया गया, जबकि विभिन्न राज्यों में धर्मांतरण-विरोधी कानूनों के तहत दर्ज मामलों की संख्या भी चर्चा में रही।
हालाँकि इन सभी आँकड़ों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता क्योंकि ये आँकड़े कभी गिने नहीं गए और न ही अब तक खत्म हुए हैं।
निष्कर्ष
ब्रिटेन की वो 12 साल की लड़की जो एक रात में टूट गई और अजमेर की वो छात्रा जिसने अपनी पूरी जवानी न्याय के इंतज़ार में गुजार दी- दोनों की चीख एक ही है। देश अलग है, भाषा अलग है लेकिन दर्द एक ही है।
ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग्स का मामला भारत के लिए एक कठोर चेतावनी है। यह चेतावनी किसी एक समुदाय के खिलाफ नारेबाजी की नहीं, बल्कि संगठित शोषण, यौन अपराध, ब्लैकमेल और मजबूरन धर्मांतरण जैसे आरोपों की गंभीर, निष्पक्ष और नेटवर्क-आधारित जाँच की है ।
अजमेर से लेकर भोपाल, इंदौर, नासिक और उत्तर प्रदेश तक के मामलों ने यह दिखाया है कि यदि समाज समय रहते संकेतों को नहीं समझता तो अपराधी तंत्र पीड़ितों को अकेला कर देता है और न्याय बहुत देर से आता है ।भारत को सचेत होना होगा, क्योंकि जब एक अपराधी के पीछे पूरा तंत्र काम कर रहा हो, तब चुप रहना और चुप करा देना सबसे खतरनाक सह-अपराध बन जाती है ।


