उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश सीमा पर निहंग सिखों और प्रशासन के बीच गुरुवार (25 जून 2026) को कई घंटों तक चला तनाव आखिरकार बातचीत के बाद खत्म हो गया।
शुरुआत में हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान कर्णप्रयाग में हुई झड़प और नागरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर बड़ी संख्या में 200 निहंगों को उत्तराखंड में प्रवेश करने के लिए विकासनगर के कुल्हाल चेकपोस्ट पर पहुँच गए थे।
प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इसी दौरान कुछ निहंगों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालाँकि देर शाम तक लगातार चली बातचीत के बाद अधिकांश निहंग वापस हिमाचल प्रदेश लौट गए और देहरादून समेत आसपास के इलाकों में हालात सामान्य होने लगे।
बैरिकेड तोड़ने के बाद बढ़ा तनाव, भारी पुलिस बल रहा तैनात
गुरुवार को बड़ी संख्या में निहंग सिख पहले हिमाचल प्रदेश के गुरुद्वारा पांवटा साहिब पहुँचे, जहाँ प्रशासन ने उन्हें समझाने की कोशिश की। बातचीत का तुरंत कोई नतीजा नहीं निकलने पर उत्तराखंड सीमा पर पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी और कई जगह बैरिकेडिंग कर दी।
VIDEO | Dehradun, Uttarakhand: Nihang Sikhs reach Kulhal-Vikasnagar border, say they won't return until four arrested Nihangs are released; heavy police force deployed.
— Press Trust of India (@PTI_News) June 25, 2026
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7)#Dehradun pic.twitter.com/oeQRlqbYqW
इसी दौरान कुछ निहंगों और पुलिस के बीच बहस हुई और कुछ लोगों ने बैरिकेड्स को नुकसान पहुँचाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोक लिया और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए।
प्रशासन ने देहरादून, ऋषिकेश और मसूरी की ओर जाने वाले कई रास्तों को एहतियातन बंद रखा। ड्रोन से निगरानी की गई और कई जिलों की पुलिस के साथ सुरक्षा एजेंसियों को भी तैनात किया गया। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था तोड़ने की किसी भी कोशिश पर सख्त कार्रवाई होगी।
कर्णप्रयाग और नागरासू विवाद से शुरू हुआ पूरा मामला
इस पूरे विवाद की शुरुआत 16 जून 2026 को कर्णप्रयाग में हुई, जहाँ पार्किंग को लेकर निहंग श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया था। दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए और पुलिस ने चार निहंगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
इसके बाद सिख संगठनों ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार निहंगों को बिना पगड़ी अदालत में पेश किया गया, जो धार्मिक परंपराओं के खिलाफ है। विरोध के बाद सरकार ने मामले की जाँच हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को सौंप दी, क्रॉस FIR दर्ज करने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जाँच के भी आदेश दिए।
इसी बीच रुद्रप्रयाग के नागरासू गुरुद्वारा लंगर साहिब में भी विवाद हो गया, जहाँ भोजन व्यवस्था और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर तनाव पैदा हुआ। कुछ निहंगों ने गुरुद्वारे में खुद को बंद कर लिया था। करीब तीन दिन तक बातचीत चलने के बाद पंजाब से पहुँचे वरिष्ठ निहंग नेताओं ने उन्हें शांतिपूर्वक बाहर आने के लिए राजी किया।
हालाँकि सोशल मीडिया पर दोनों घटनाओं को जोड़कर कई तरह के दावे किए गए, लेकिन उत्तराखंड पुलिस ने साफ किया है कि कर्णप्रयाग और नागरासू की घटनाएँ अलग-अलग हैं और इनके बीच किसी तरह का संबंध नहीं है।

