NDA की बढ़त नहीं हो रही कॉन्ग्रेस-सपा-DMK से बर्दाश्त, चुनाव आयोग पर मढ़े जा रहे इल्जाम: किसी ने BJP-JDU को कोसा, किसी ने RSS तक पर नाराजगी जताई

बिहार चुनाव के परिणामों के अभी शुरुआती रुझान ही सामने आए हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस, सपा और DMK ने चुनाव आयोग पर टिप्पणी कर गलतियाँ निकालने और निराधार आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। कॉन्ग्रेस नेता राशिद अलवी ने कहा है, “मुझे मालूम है कि फर्स्ट फेज के बाद हरियाणा और यूपी से लाखों लोगों को बिहार भेजा गया था। ब्यूरोक्रेसी पर दबाव बनाया गया।”

उन्होंने कहा, मैं दो बातें पूछना चाहता हूँ इलेक्शन कमीशन से, भारतीय जनता पार्टी ने कल से बिहार में पटना में लड्डू बनाने शुरू कर दिए थे, कैसे कर दिए थे आपने? आपको कैसे मालूम था कि कल को आपकी सरकार का ऐलान होने वाला है।”

उन्होंने आगे कहा, “दूसरी बात अमित शाह जी ने एक पब्लिक मीटिंग में ऐलान किया था कि हमने इस बार पहले 6 फेज में होता था अगली बार एक में होगा, क्या आप इलेक्शन कमीशन है? उनका कहना है कि ये मिली जुली-कुश्ती थी और विपक्ष को सोचना पड़ेगा कि अगर इन लोगों से मुकाबला करना है तो क्या स्ट्रेटजी बनानी पड़ेगी।”

इसी तरह समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “बिहार में जो खेल SIR ने किया है वो पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, यूपी और बाकी जगह पर अब नहीं हो पायेगा क्योंकि इस चुनावी साजिश का अब भंडाफोड़ हो चुका है। अब आगे हम ये खेल, इनको नहीं खेलने देंगे। CCTV की तरह हमारा ‘PPTV’ मतलब ‘पीडीए प्रहरी’ चौकन्ना रहकर भाजपाई मंसूबों को नाकाम करेगा। भाजपा दल नहीं छल है।”

दूसरी ओर कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, “मुकाबला सीधा भारत के चुनाव आयोग और बिहार की जनता के बीच है और देखते हैं कौन जीतता है। मैं पार्टियों की बात नहीं कर रहा। मैं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और बिहार की जनता के बीच सीधे मुकाबले की बात कर रहा हूँ।”

उन्होंने कहा, “ये तो बस शुरुआती रुझान हैं, हम थोड़ा इंतजार कर रहे हैं। शुरुआती रुझान तो यही बता रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार बिहार की जनता पर भारी पड़ रहे हैं… मैं बिहार की जनता को कम नहीं आंक सकता। उन्होंने हिम्मत दिखाई है। उन्होंने SIR के बावजूद हिम्मत दिखाई है। अब देखते हैं आने वाले घंटों में ज्ञानेश कुमार कितने कारगर साबित होते हैं।”

वहीं डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा, “वे चुनाव आयोग को अपनी कठपुतली बनाकर और उसके समर्थन से काम करके घटिया, घटिया राजनीति कर रहे हैं। ये तो बस शुरुआती संकेत हैं, आखिरी नतीजे का इंतजार कीजिए।”

बिहार विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों में NDA को बढ़त मिलते ही कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने भी चुनाव आयोग और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में भारी गड़बड़ियों की शिकायतों को नजरअंदाज किया गया, जिसे उन्होंने लोकतंत्र की हत्या बताया।

पटना में मीडिया से बात करते हुए उदित राज ने आरोप लगाया कि विपक्षी समर्थकों के नाम सूची से हटाए गए और कई  मतदाताओं को डिजिटल स्लिप होने के बावजूद वापस भेज दिया गया।

इस तरह के बयानों से साफ समझा जा सकता है कि जो नतीजे अभी सामने आ रहे हैं, उनको देखकर ही इन पार्टियों को बढ़त और जीत का अंदाजा लग चुका है। ऐसे में अब इनके पास चुनाव आयोग की बेबुनियाद गलतियाँ निकालने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है।