मुकेश सहनी ने कहा, “हम इस जनादेश को स्वीकार करते हैं और NDA को जीतने पर उनको मैं बधाई देता हूँ। माताओं-बहनों का वोट NDA के पक्ष में गया है, जिसके कारण उनकी इतनी बड़ी जीत हो रही है। मैं जनादेश का सम्मान करते हुए इसे(हार) स्वीकार करता हूँ। आने वाले समय में हम और मंथन करेंगे कि विफल होने का क्या कारण है।”
#WATCH | पटना: VIP प्रमुख मुकेश सहनी ने कहा, "हम इस जनादेश को स्वीकार करते हैं और जो जीते हैं-NDA, उनको मैं बधाई देता हूं…माताओं-बहनों का वोट NDA के पक्ष में गिरा है, जिसके कारण उनकी इतनी बड़ी जीत हो रही है…मैं जनादेश का सम्मान करते हुए इसे(हार) स्वीकार करता हूं। आने वाले समय… pic.twitter.com/R7lCcsLU1Z
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 14, 2025
दरअसल मुकेश सहनी और उनकी पार्टी को ऐसा आशंका नहीं थी कि उनका सूपड़ा साफ हो जाएगा। डिप्टी सीएम बनने का दावा करने वाले नेता की पार्टी को एक भी सीट नहीं आएगा। ये पार्टी के साथ-साथ मुकेश सहनी के लिए भी शर्मनाक है। मल्लाह जाति का प्रतिनिधित्व करने का दम भरने वाले मुकेश सहनी और विकासशील इंसान पार्टी को सचमुच अपनी रणनीति पर मंथन करने की जरूरत है।
2018 में मुकेश सहनी ने वीआईपी का गठन किया था। 2020 का विधान सभा चुनाव उन्होंने एनडीए के घटक दल के रूप में लड़ा। इस चुनाव में उन्हें 4 सीटें मिली। इसका फायदा मिला और उन्हें मछलीपालन मंत्री बना दिया गया। वीआईपी ने जिन सीटों को जीता था, उनमें बोचाहा, गौरा बौराम, अलीनगर और साहेबगंज शामिल है। हालाँकि साहेबगंज के वीआईपी विधायक राजेश कुमार सिंह ने बाद में बीजेपी ज्वाइन कर लिया।
2022 में एनडीए की सरकार गिर गई और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। एनडीए जब सत्ता में आई तब तक उनका मन बदल गया और उन्होंने महागठबंधन का दामन थाम लिया।
2025 विधानसभा चुनाव में महागठबंधन ने जब मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम का चेहरा घोषित किया, तो ये उनकी रणनीतिक जीत मानी जा रही थी। उन्होंने महागठबंधन के सीएम चेहरा तेजस्वी यादव को अपना ‘छोटा भाई’ भी बताया। लेकिन रिजल्ट आया तो जनता ने ‘बड़े मियाँ-छोटे मियाँ’ दोनों को चारो खाने चित कर दिया।

