यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) की 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत को लेकर अमेरिका का दोगलापन फिर सामने आया है। रिपोर्ट में भारत और पीएम मोदी परकई तरह के आरोप लगाए गए हैं।
रिपोर्ट में राम मंदिर के निर्माण और बाबारी मस्जिद के विध्वंस को लेकर कई बातें लिखी गई हैं। इसमें लिखा है कि साल 2024 में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति बिगड़ गई। हालाँकि भारत ने इन आरोपों को पहले भी पक्षपातपूर्ण बताया है।
रिपोर्ट में 1992 में बाबरी मस्जिद को ढहाने से राम मंदिर को जोड़ा गया है। बाबरी विध्वंस की वही पुरानी कहानी लिखी गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बस जरा सा जिक्र कर उसे किनारे कर दिया गया है।
RSS को निशाने पर लेकर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि RSS का उद्देश्य- धार्मिक परिवर्तन को रोकना, गोहत्या पर रोक और स्कूल की पाठ्य पुस्तकों से मुस्लिम शासकों से जुड़ी बातें हटवाने के एजेंडों को आगे बढ़ाना है।
रिपोर्ट में ‘एंटी कन्वर्जन लॉ’ का भी जिक्र किया गया है। लिखा गया है कि साल भर में, 28 में से 12 राज्यों ने नए धर्मांतरण-विरोधी कानून लागू करने या मौजूदा कानूनों को और सख्त बनाने की कोशिश की।
इसमें छत्तीसगढ़ के ईसाई पादरी द्वारा जबरन हिंदुओं का धर्म परिवर्तन, असम सरकार ने असम हीलिंग (प्रिवेंशन ऑफ ईविल) प्रैक्टिसेज बिल, राजस्थान में लव जिहाद के लिए नया कानून और गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट समेत अन्य मामलों का जिक्र किया गया।
रिपोर्ट में पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा गया है। लिखा गया है कि जून चुनावों से पहले मुसलमानों के खिलाफ नफरती भाषण और भेदभावपूर्ण बयानबाजी की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम मोदी ने मुसलमानों को ‘घुसपैठिए’ कहा और गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अगर विपक्ष सत्ता में आया तो वह शरीयत लागू करेगा। हैरान करने वाली बात ये है कि विपक्ष के चुनावी घोषणापत्र तक में ऐसी कोई बात शामिल नहीं थी।
बताते चलें कि USCIRF ने पहले भी भारत के खिलाफ रिपोर्ट जारी कर चुका है। इस बार की रिपोर्ट में भी आयोग ने भारत की घरेलू नीतियों, अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित फैसलों और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर वही पुराने आरोप दोहराए हैं। इन आरोपों को भारत सरकार पहले और इस बार भी ‘भ्रामक’, ‘तथ्यहीन’ और ‘एक एजेंडे से प्रेरित’ बता चुकी है।
इससे पहले भी जब USCIRF ने भारत पर आरोपो लगाए थे तो विदेश मंत्रालय ने आयोग को काफी खरी-खरी सुनाई थी। अपना फजीहत होने के बाद भी USCIRF अपनी आदत से बाज नहीं आता। पिछली बार खरी खरी सुनने के बावजूद इस बार आयोग ने फिर से वही आरोप भारत पर लगाए।
विदेश मंत्रालय ने कहा था, “भारत 1.4 अरब लोगों का घर है, जो मानव जाति द्वारा ज्ञात सभी धर्मों के अनुयायी हैं। हालाँकि, हमें कोई उम्मीद नहीं है कि यूएससीआईआरएफ (USCIRF) भारत के बहुलतावादी ढाँचे की वास्तविकता को स्वीकार करेगा या इसकी विविध समुदायों के सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व को मान्यता देगा। भारत की लोकतंत्र और सहिष्णुता की मिसाल को कमजोर करने के ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे। असल में, USCIRF को ही चिंता का विषय घोषित किया जाना चाहिए।”

