असम सरकार ने राज्य में बहुविवाह पर पुरी तरह रोक लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। असम सरकार ने गुरुवार (27 नवंबर 2025) को विधानसभा में बहुविवाह विरोधी विधेयक (प्रोहीबिशन ऑफ पॉलीगैमी बिल) 2025 पास कर दिया गया है।
बिल के पारित होने के साथ ही असम देश का वह प्रमुख राज्य बन गया है, जिसने बहुविवाह को सीधे तौर पर दंडनीय अपराध घोषित कर दिया है। सरकार का दावा है कि यह कानून महिलाओं, खासकर अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक सुधार साबित होगा।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे महिलाओं की गरिमा, शिक्षा और सशक्तिकरण से जोड़ते हुए कहा कि बहुविवाह और बाल विवाह/निकाह जैसी प्रथाएँ समाज के विकास में सबसे बड़ी बाधा रही हैं।
विधानसभा में हुई लंबी बहस, विपक्ष की आपत्तियों और सामाजिक संवेदनशीलताओं के बीच यह बिल ऐसे समय में पास हुआ है, जब राज्य में महिला अधिकारों और यूनिफॉर्म सिविल कोड की चर्चा भी चल रही है।
क्या है यह बिल
असम बहुविवाह विरोधी विधेयक (प्रोहिबिशन ऑफ पोलिगैमी बिल), 2025 का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा करना और गैरकानूनी बहुविवाह को रोकना है। बिल के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा पहले विवाह/निकाह की जानकारी छुपाकर दूसरा विवाह/निकाह करना 10 साल तक की जेल की सजा का कारण बनेगा।
यदि कोई व्यक्ति पहले विवाह/निकाह को खतम किए बिना दूसरा विवाह/निकाह करता है, तो उसे 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। बार-बार उल्लंघन करने वालों को दोगुनी सजा दी जाएगी।
इसके साथ ही पंडित/काजी, जो इस तरह के विवाह/निकाह कराते हैं, उन पर भी 1.5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और पुलिस से जानकारी छिपाने पर 2 साल तक की जेल हो सकती है।
अपराधियों को राज्य सरकार की नौकरी, सरकारी योजनाओं और विधानसभा चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाएगा। महिला पीड़ितों को आर्थिक मुआवजा भी दिया जाएगा, जिसे राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकरण (tribunal) द्वारा केस के आधार पर तय किया जाएगा। हालाँकि यह कानून बोडोलैंड क्षेत्र, डिमा हासो, कार्बी अंग्लोंग, पश्चिम कार्बी अंग्लोंग और अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होगा।
CM बोले- इस्लाम के खिलाफ नहीं ये कानून
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बिल को पास करते हुए कहा कि यह कानून इस्लाम के खिलाफ नहीं है और इसे सच्चे इस्लामी लोग स्वीकार करेंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई देश जैसे तुर्की और पाकिस्तान में भी बहुविवाह पर रोक है।
उन्होंने यह भी बताया कि अगर उन्हें फिर से मुख्यमंत्री चुना गया, तो वह राज्य में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करेंगे और महिलाओं की न्यूनतम कानूनी विवाह/निकाह की उम्र 21 साल करेंगे।
बिल को पास करने से पहले विधानसभा में दिनभर बहस हुई। मुख्यमंत्री ने बच्चों की शादी और बहुविवाह को महिलाओं के लिए अभिशाप बताया और कहा कि इसके तहत 5,000 से अधिक लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि निजुत मैना योजना के तहत इस साल 50,000 कॉलेज जाने वाली लड़कियों को लाभ मिला है, जिससे लड़कियों का स्कूल और कॉलेज में नामांकन बढ़ा और ड्रॉपआउट दर लगभग शून्य हो गया है।
विपक्षी दल AIUDF के अमिनुल इस्लाम ने बिल का विरोध करते हुए इसे संविधान के कुछ अनुच्छेदों के खिलाफ बताया। इस कानून के लागू होने के बाद असम में बहुविवाह अब संगीन अपराध बन जाएगा और पुलिस शिकायत मिलने पर बिना वारंट गिरफ्तारी और तुरंत जाँच कर सकेगी।

