रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा बहुत सफल रही है। इस दौरे से दोनों देशों के राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते और मजबूत हुए हैं। भारत और रूस ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और अंतरिक्ष जैसे अहम क्षेत्रों में नई साझेदारी की रूपरेखा तैयार की है। पुतिन के बयानों ने अफगानिस्तान की स्थिति पर भी दुनिया का ध्यान खींचा है। यह यात्रा भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देने वाली साबित हुई है।
अफगानिस्तान पर रूस का नया रुख
पुतिन ने अपनी यात्रा के दौरान अफगानिस्तान पर बड़ा बयान दिया। पुतिन ने तालिबान सरकार को सही दिशा में काम करने वाला बताया। पुतिन ने कहा कि तालिबान आतंकवाद को रोकने और अफीम उत्पादन कम करने में एक्टिव है।
रूस पहले ही तालिबान को आधिकारिक मान्यता देने वाला पहला बड़ा देश बन चुका है। पुतिन ने कहा कि तालिबान ने दशकों के संघर्ष के बाद अफगानिस्तान को स्थिर किया है। उनका यह बयान उस पाकिस्तान की आलोचना के जवाब में आया जो तालिबान पर आतंकवाद बढ़ाने का आरोप लगा रहा था।
ऊर्जा और व्यापार में साझेदारी गहरी
भारत और रूस ने ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। रूस भारत को कच्चा तेल, गैस और न्यूक्लियर तकनीक देता रहेगा। भारत ने 2047 तक छोटे न्यूक्लियर रिएक्टरों से 100 गीगावॉट बिजली बनाने का लक्ष्य रखा है।
रूस इसमें तकनीकी मदद करेगा। दोनों देशों ने व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य बनाया है। रूस ने कहा कि उनकी कम होती आबादी के कारण भारत के लाखों युवाओं को नौकरी के मौके मिल सकते हैं। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय उत्तरी-दक्षिणी परिवहन कॉरिडोर (INSTC) को तेज करने पर भी सहमति जताई। इससे दोनों के बीच माल परिवहन का समय आधा हो जाएगा।
रक्षा, अंतरिक्ष और मीडिया में नई गति
रक्षा साझेदारी इस दौरे का मुख्य हिस्सा रही। भारत और रूस अब मिलकर हथियारों का शोध, निर्माण और उत्पादन करेंगे। यह भारत की ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा नीति को ताकत देगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में, दोनों देश मानव मिशन, नेविगेशन और गहरे अंतरिक्ष शोध में साथ काम करेंगे।
इस दौरान भारत में रूसी चैनल RT इंडिया की शुरुआत भी हुई। पुतिन ने इसे सच्ची जानकारी देने वाला मंच बताया। उन्होंने कहा कि कुछ देश इसे रोकते हैं क्योंकि वे दूसरे विचारों से डरते हैं।

