टोकाटोकी पर राहुल गाँधी को झिड़का, नेहरू-इंदिरा-सोनिया का नाम लेकर खोले ‘वोट चोरी’ के धागे: SIR पर संसद में अमित शाह ने विपक्ष को कर दिया नंगा

लोकसभा में बुधवार (10 दिसंबर 2025) को गृहमंत्री अमित शाह ने विशेष गहन संशोधन (SIR) पर बहस के दौरान विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। SIR को मतदाता सूची का शुद्धिकरण बताते हुए उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करने का जरूरी कदम है।

विपक्ष के आरोपों का खारिज करते हुए शाह ने ऐतिहासिक उदाहरणों से वोट चोरी के तीन आयाम गिनाए और कॉन्ग्रेस पर पुरानी साजिशों का ठीकरा फोड़ा। सदन में रात भर बहस के लिए तैयार रहने का ऐलान करते हुए उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि सवाल पूछो, जवाब दूँगा।

अमित शाह ने 2010 के नियम पर डाली रोशनी, बताया SIR क्यों जरूरी

शाह ने SIR की शुरुआत पर रोशनी डालते हुए कहा कि साल 2004 तक किसी भी दल ने इसकी मुखालफत नहीं की। वजह साफ थी- सभी पार्टियाँ मतदाता सूची की शुद्धता पर एकमत थीं। लेकिन 2010 में एक चुनाव आयुक्त ने फैसला लिया कि रिटर्निंग अफसर किसी का नाम सूची से नहीं काट सकता। नतीजा? मरने वालों के नाम बने रहे, दूसरे इलाके चले जाने वालों के नाम न कटे, यहाँ तक कि सरकारी कर्मचारियों के नाम भी ट्रांसफर पर न बदले। उस वक्त कॉन्ग्रेस सत्ता में थी, लेकिन अब SIR पर चिल्ला रही है।

अमित शाह ने बताया- क्या है SIR

SIR क्या है, इस पर शाह ने सदन को सरल शब्दों में समझाया। यह सिर्फ मतदाता सूची का साफ-सुथरा करना है। जिनकी मौत हो गई, उनके नाम काटो। 18 साल पूरे कर चुके युवाओं के नाम जोड़ो। दो जगह रजिस्टर्ड नामों में से एक काटो। और विदेशी नागरिकों को चुन-चुनकर हटाओ। शाह ने सीधा सवाल दागा- क्या लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा अगर घुसपैठिए प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री तय करने लगें? सदन के जरिए जनता से अपील की कि ऐसी स्थिति बर्दाश्त नहीं।

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “SIR कुछ नहीं है, सिर्फ मतदाता सूची का शुद्धिकरण है। मैं मानता हूँ कि इससे कुछ दलों के राजनीतिक स्वार्थ आहत होंगे, मुझे उन दलों के प्रति सहानुभूति भी है। क्योंकि देश के मतदाता तो उन्हें वोट देते नहीं, जो घुसपैठिए देते हैं, वो भी चले जाएँगे।”

शाह ने कानूनी आधार पर विपक्ष को घेरा

अमित शाह ने कहा, “साल 1995 में लालबाबू हुसैन बनाम मतदाता रजिस्ट्रेशन ऑफिसर का जजमेंट आया, उसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि जहाँ मतदाता का नाम दर्ज किया जाना है, वहाँ रिटर्निंग अफसर ये सुनिश्चित कर सकता है कि आवेदक भारत का नागरिक है या नहीं है। ये लोग जो कहते हैं कि इलेक्शन कमीशन कैसे तय कर सकता है कि कौन मतदाता सूची में रहेगा या नहीं, ये हमारा फैसला नहीं सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि इलेक्शन कमीशन-रिटर्निंग अफसर तय करेगा कि कौन मतदाता सूची में रहेगा और कौन नहीं।”

मतदाता सूची नई हो या पुरानी, आपका हारना तय: गृहमंत्री अमित शाह

बहस को लंबा खींचने की चुनौती देते हुए शाह ने कहा- मैं सदन में आधी रात तक बैठने को तैयार हूं। मेरा भाषण खत्म होने के बाद जो भी सवाल पूछोगे, सबके जवाब दूँगा। विपक्ष के हारने के दर्द पर तंज कसते हुए अमित शाह बोले- मतदाता सूची नई हो या पुरानी, आपका हारना तय है। हमारी सरकारें बार-बार चुनकर आती हैं, लेकिन बीजेपी को भी एंटी-इनकंबेंसी झेलनी पड़ती है। हम एक चुनाव भी नहीं हारे, ऐसा नहीं कहते।

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “हमारी सरकारें बार-बार चुनकर आती हैं। फिर भी बीजेपी को भी एंटी इन्कम्बेंसी सामना करना पड़ता है। ये सही नहीं है कि हम एक भी चुनाव नहीं हारे। हम भी कई चुनाव हारे। छत्तीसगढ़ में 18 में हारे, राजस्थान-मध्य प्रदेश में 18 में हारे। कर्नाटक में भी 14 के बाद हारे। तेलंगाना में हम जीत नहीं पाए, चेन्नई में भी हम जीत नहीं पाए। बंगाल में भी हम हारे। तब तो ये मतदाता सूची बहुत अच्छी होती है, टप से आप नए कपड़े पहन कर शपथ ले लेते हो। उस वक्त मतदाता सूची का विरोध नहीं करते हो। जब मुँह की पटखनी पड़ती है बिहार की तरह, तब मतदाता सूची को गलत बताते हो। दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे लोकतंत्र में। जब आप जीतते हो, तब चुनाव आयोग महान है। जब आप हारते हो, चुनाव आयोग निकम्मा है-बीजेपी के कहने पर चलता है। जब आप जीतते हो, तब मतदाता सूची अच्छी है। जब आप हारते हो, तो मतदाता सूची खराब हो। इन भ्रांतियों को लेकर मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मेरा दायित्व है कि मैं देश की जनता को सही जानकारी दूँ, जो मैं सदन में खड़े होकर बोल रहा हूँ।”

गृहमंत्री ने राहुल गाँधी के तीनों प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी कसा तंज

गृहमंत्री अमित शाह ने राहुल गाँधी के कथित वोट चोरी के मुद्दे पर की गई तीनों प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी तंज कसा। अमित शाह ने कहा, “3 प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। 1- सादा प्रेस कॉन्फ्रेंस, 2- एटम बम वाला प्रेस कॉन्फ्रेंस और तीसरा- परमाणु बम वाला प्रेस कॉन्फ्रेंस… मैं तीनों के जवाब दे रहा हूँ। ये कहते हैं कि 2-2 जगह मतदाता हैं। मान्यवर जिनके नाम 2 जगह रजिस्टर्ड हैं, उसका दोष नहीं- क्योंकि व्यक्ति एक जगह से दूसरी जगह जा रहा है, तो 2010 के नियम के मुताबिक, रिटर्निंग अफसर उनके नाम नहीं काट सकता। कई सांसदों के नाम 2-2 जगह हैं।”

गृहमंत्री अमित शाह ने गिनाई तीन तरह की वोट चोरी

गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा, “SIR को आप वोट चोरी कह रहे हैं। मान्यवर वोट चोरी किसी कहते हैं, वो मैं बताना चाहता हूँ। हमारे यहाँ कुछ परिवार ऐसे हैं, जो पुश्तैनी वोट चोर हैं।” उन्होंने कहा, “वोट चोरी के 3 आयाम है, 1- मतदाता नहीं हैं यानि योग्य नहीं हैं फिर भी वोटर बन जाते हैं, वो वोट चोरी है। 2- आप गलत प्रकार से चुनाव जीतते हो, वो वोट चोरी है। 3- आप जनादेश को दरकिनार करके कोई पद प्राप्त करते हैं, तो ये भी एक प्रकार का वोट चोरी होता है।”

गृहमंत्री अमिता शाह ने कहा कि मैं वोट चोरी की 3 घटनाएँ बताता हूँ। उन्होंने आगे कहा, “पहली वोट चोरी- आजादी के बाद देश का प्रधानमंत्री चुनना था। उस वक्त प्रांत अध्यक्षों के वोट से प्रधानमंत्री तय होना था। उसमें 28 वोट सरदार वल्लभ भाई पटेल को मिले, 2 वोट जवाहरलाल नेहरू को मिले और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बने। ये वोट चोरी होती है।”

अमित शाह ने दूसरी वोट चोरी पर कहा, “श्रीमती इंदिरा गाँधी रायबरेली से चुनी गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट में श्री राजनारायन पहुंचे कि चुनाव नियमों के अनुसार नहीं हुआ। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ये तय कर दिया कि श्रीमती गाँधी ने उचित तरीके से चुनाव नहीं जीता है, हम इसे रद्द करते हैं। ये भी वोट चोरी है। उस वोट चोरी को ढकने के लिए संसद में कानून लाया गया- प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई केस ही नहीं हो सकता। ये इम्युनिटी जो श्रीमती गाँधी ने खुद के लिए ली थी, उस पर नेता विपक्ष को क्या कहना है? अपने कारनामों को ढकने के लिए 2-3-4 नंबर के जज को बाईपास करके जूनियर को CJI बना दिया।”

तीसरे प्रकार की वोट चोरी पर बोलते हुए अमित साह ने कहा, “तीसरे प्रकार की वोट चोरी वो है, जिसमें योग्यता न होने पर भी मतदाता बन जाना। अभी-अभी एक वाद दिल्ली की सिविल अदालत में पहुँचा है। उसमें विवाद ये है कि श्रीमती सोनिया गाँधी जी देश की नागरिक बनने से पहले मतदाता थी। मान्यवर, इसका जवाब अदालत में सोनिया जी को देना है।”

हम 44 चुनाव जीते, आप भी 30 चुनाव जीते, लेकिन हार के बाद ही EVM का रोना क्यों?

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “मई 2014 में माननीय नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने। हम 3 लोकसभा चुनाव जीते और 41 राज्यों के विधानसभा चुनाव जीते। 2014 से 2025 के बीच… वो भी 30 चुनाव अलग-अलग राज्यों की विधानसभा चुनाव जीते। अगर मतदाता सूची गलत है, तो क्यों शपथ लिया?”

गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा, “प्रेस में कोई सवाल पूछता है, तो उसे बीजेपी का आदमी बताते हैं। केस आते हैं, तो जज पर आरोप जड़ देते हैं। चुनाव हारते हैं, तो ईवीएम पर आरोप लगाते हैं। EVM की दलील अब गले नहीं उतरती, तो अब वोट चोरी का मुद्दा लेकर आ गए। वोट चोरी का मुद्दा लेकर पूरे बिहार में यात्रा निकाली, फिर भी हार गए। आपकी हार का कारण आपका नेतृत्व है, हार का कारण EVM और मतदाता सूची नहीं है।”

अमित शाह ने कहा, “2014 के बाद हारने की परंपरा शुरू हुई। हारने की परंपरा शुरू होने के बाद इन्होंने सबसे पहले EVM को निशाना बनाया। मैं देश की जनता को बताना चाहता हूँ- EVM कौन लेकर आया। 15 मार्च 1989 को जब राजीव गाँधी प्रधानमंत्री थे, तब ईवीएम लाने का कानून बना। इसके बाद EVM के खिलाफ किसी ने याचिका दाखिल की गई। फिर 16 विधानसभा सीटों पर इसका ट्रायल किया गया। हर प्रकार से ट्रायल करके ईवीएम का प्रयोग 2004 में पूरे देश में हुआ। हमारे समय में ईवीएम का इस्तेमाल हुआ, जिसमें कॉन्ग्रेस जीती। उस समय ईवीएम की चर्चा नहीं हुई। 2009 का चुनाव भी EVM से हुआ, ये लोग जीते। चुप्पी साध ली। 2014 में हम जीते, तो ये लोग हल्ला मचाने लगे।”

कॉन्ग्रेस पार्टी ने चुनाव सुझाव के लिए एक भी बार नहीं किया चुनाव आयोग से संपर्क

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “मैंने चुनाव आयोग से पूछा कि मई 2014 के बाद से किस पार्टी ने कितनी बार चुनाव सुधार के लिए संपर्क किया। मुझे लगा कि कॉन्ग्रेस पार्टी को ज्यादा समस्याएँ रहती हैं, तो शायद कॉन्ग्रेस पार्टी ने खूब सारे सुझाव दिए होंगे, लेकिन मैं हैरान हूँ कि कॉन्ग्रेस ने एक भी चुनाव सुधार आयोग को नहीं सुझाए।”

73 साल तक बिना कानून के बनाए जाते रहे चुनाव आयुक्त

गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बोलते हुए कहा, “73 साल तक इस देश में चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का कोई कानून नहीं था। ये नियुक्ति सीधे प्रधानमंत्री करते थे। मैं देश को बताना चाहता हूँ कि अब तक जितने चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त हुए, वो इसी प्रकार से चुने गए। 1950 से 1989 प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के पास फाइल भेजते थे, और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति हो जाती थी। उनके 55 साल में प्रधानमंत्री ने ही चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की।”

शाह ने कहा, “1989 में पहली बार चुनाव आयोग को बहुसदस्यीय बनाया गया। तब भी नियुक्ति प्रधानमंत्री की फाइल से ही होती थी। ये परंपरा और कानून कॉन्ग्रेस ने ही बनाया था। “

उन्होंने आगे कहा, “1950 से 2023 तक कोई कानून नहीं था। साल 2023 में अनूप बरनवाल बनाम भारत सरकार एक मुकदमा हुआ। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में थोड़ी पारदर्शिता रखी जाए। सरकार की तरफ से बताया गया कि कानून बनाने में थोड़ी देर लगेगी। इसमें चुनाव आयोग से भी बात करनी पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आप सहमत हो, तो जब तक कानून नहीं बनता, तब तक सीजेआई की अध्यक्षता में कमेटी बने, जिसमें पीएम और नेता प्रतिपक्ष शामिल हो। हमें कोई आपत्ति नहीं थी और 2023 में कानून बन गया। कानून में विपक्ष के नेता, प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री द्वारा तय किए गए मंत्री मिलकर तय करेंगे कि कौन चुनाव आयुक्त बनेगा। आपके समय में तो ये भी मौका नहीं था।”

चावला जैसे आदमी को विरोध के बावजूद बनाया CEC

अमित शाह ने कॉन्ग्रेस को बेनकाब करते हुए कहा, “साल 2012 में सीईसी की नियुक्ति होनी थी। आडवाणी जी ने सुझाव दिया कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए सिस्टम बनाया जाए, इन्होंने ध्यान तक नहीं दिया और वी एस संपथ को सीईसी बना दिया। यही नहीं, उससे पहले के चुनाव आयुक्त नवीन चावला, जिसपर इमरजेंसी के दौरान उनकी भूमिका पर शाह आयोग ने कहा था ये निष्पक्ष नहीं है, उन्हें चुनाव बना दिया गया। जबकि उस समय के मुख्य चुनाव आयुक्त एल गोपालास्वामी ने भी आपत्ति जताई थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया।”

गृहमंत्री अमित शाह के भाषण के दौरान सदन में लगातार नोकझोंक भी होती रही। विपक्ष के सांसदों ने बीच-बीच में हंगामा की भी कोशिश की, लेकिन शाह ने शांत स्वर में जवाब दिए। उन्होंने कहा- लोकतंत्र में बहस होनी चाहिए, लेकिन तथ्यों पर ही।