अमेरिका पर डेनमार्क ने लगाया रेड मार्क, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बताया खतरा: वजह जानिए

पहली बार डेनमार्क ने अपनी सालाना सुरक्षा रिपोर्ट में संयुक्त राज्य अमेरिका को भी संभावित सुरक्षा खतरे के रूप में पहचाना है। यह रिपोर्ट बुधवार (10 दिसंबर 2025) को देश की प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों में से एक डेनिश डिफेंस इंटेलिजेंस सर्विस, द्वारा संसद में प्रस्तुत की गई।

डेनमार्क की यह एजेंसी देश की दो मुख्य जासूसी संस्थाओं में से एक है। यह विकास इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका और यूरोप के बीच संबंध पहले से ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, डेनमार्क और पूरे यूरोप की राष्ट्रीय सुरक्षा को अब अमेरिका से भी खतरा हो सकता है। दस्तावेज में कहा गया है कि ट्रम्प प्रशासन अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक दबाव, हाई टैरिफ और सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करने की आदत को दिखाता है, चाहे वह उसके साझेदार देश ही क्यों न हों।

रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि “दुनिया की बड़ी शक्तियाँ अब अपने हितों को सबसे ऊपर रख रही हैं और अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए शक्ति का इस्तेमाल कर रही हैं।”

एजेंसी ने चीन और रूस को भी सुरक्षा खतरे की श्रेणी में रखा है। लेकिन इस बार अमेरिका को अलग से मार्क करना एक ऐतिहासिक और असामान्य कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय सुरक्षा के गारंटर के रूप में अमेरिका की भूमिका अब अनिश्चित हो गई है, क्योंकि अमेरिका अब यूरोप के बजाय चीन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।

दस्तावेज में ट्रम्प प्रशासन की टैरिफ नीति, आर्कटिक क्षेत्र में उसकी बढ़ती गतिविधियों और यूरोपीय नेताओं की उन चिंताओं का भी उल्लेख किया गया है, जो वे अमेरिका फर्स्ट विदेश नीति को लेकर पहले से जता रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, “संयुक्त राज्य अमेरिका आर्थिक दबाव का इस्तेमाल करता है, जिसमें हाई टैरिफ की धमकी भी शामिल है और अब वह सैन्य बल के उपयोग की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं करता, चाहे वह उसके सहयोगी ही क्यों न हों।”

ध्यान देने वाली बात यह है कि ट्रम्प प्रशासन ने अपनी नवीनतम राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में यूरोप को सभ्यता के मिट जाने के गंभीर खतरे की चेतावनी दी है और कहा है कि यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए।

दस्तावेज में यह भी लिखा गया है कि अमेरिका को यूरोप में ऐसे राजनीतिक दलों का समर्थन करना चाहिए जो इमिग्रेशन का विरोध करते हैं और राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाते हैं, ताकि वहाँ प्रतिरोध तैयार हो सके।

दूसरी ओर ट्रम्प कई बार ग्रीनलैंड पर अधिकार करने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं, जिसने वाशिंगटन और कोपेनहेगन के संबंधों में तनाव पैदा किया है। ग्रीनलैंड डेनमार्क के साम्राज्य का हिस्सा और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है।

ट्रम्प ने यहाँ तक कहा कि वे जरूरत पड़ने पर दुनिया के सबसे बड़े द्वीप पर सैन्य बल तैनात करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। इसके अलावा, डेनमार्क उन यूरोपीय देशों में शामिल है जो व्हाइट हाउस की यूक्रेन शांति योजना का विरोध करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यह योजना कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर रूस के पक्ष में झुकाव दिखाती है।