‘भारत हमारा दोस्त, उनपर से हटाओ 50% टैक्स’: अमेरिकी संसद में उठी आवाज, 22 सांसद ट्रंप की नीतियों के विरोध में उतरे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 50 फीसदी तक भारी टैक्स लगा दिया था। अब अमेरिका के तीन डेमोक्रेटिक सांसदों ने इसका विरोध किया है। उन्होंने संसद में एक प्रस्ताव पेश कर कहा है कि जिस राष्ट्रीय आपातकाल के नाम पर यह टैक्स लगाया गया, उसे खत्म किया जाए।

सांसदों का कहना है कि ये टैक्स सही नहीं हैं और कानून के खिलाफ हैं। इससे आम अमेरिकी लोगों के लिए चीजें महँगी हो रही हैं। साथ ही, भारत जैसे अहम दोस्त देश के साथ अमेरिका के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को भी नुकसान पहुँच रहा है।

सांसदों की खुली आपत्ति

अमेरिकी सांसदों ने इन टैरिफ का खुलकर विरोध किया और कहा कि ये टैरिफ अमेरिका के लिए ही ठीक नहीं हैं। डेबोरा रॉस ने बताया कि भारतीय कंपनियों ने नॉर्थ कैरोलिना में बहुत सारा पैसा लगाया है और हजारों लोगों को नौकरी दी है। उनका कहना था कि ये टैरिफ उस अच्छे आर्थिक रिश्ते को खराब कर रहे हैं।

मार्क वीजी ने कहा कि ये गैर-कानूनी शुल्क नॉर्थ टेक्सास के आम लोगों पर महँगाई का बोझ डाल रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि भारत अमेरिका का एक बहुत जरूरी दोस्त और आर्थिक साथी है।

राजा कृष्णमूर्ति ने चेतावनी दी कि ये शुल्क बाजार की सप्लाई चेन (चीज़ों के आने-जाने की व्यवस्था) को खराब कर रहे हैं और इससे अमेरिकी ग्राहकों की जेब पर मार पड़ रही है। उन्होंने जोर दिया कि टैरिफ हटाने से ही अमेरिका और भारत के आर्थिक और सुरक्षा संबंध और भी मजबूत होंगे।

टैरिफ क्यों और कितना लगा?

ट्रंप सरकार ने भारत से आने वाले सामानों पर 50% तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया था। इसके लिए उन्होंने एक खास कानून इस्तेमाल किया, जिसे इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) कहते हैं। यह टैरिफ एक बार में नहीं, बल्कि दो हिस्सों में लगाया गया था।

पहला शुल्क 1 अगस्त 2025 को 25% का लगाया गया था। इसे ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ कहा गया। इसके बाद, दूसरा शुल्क 27 अगस्त 2025 को अतिरिक्त 25% का एक और जोड़ा गया। इसे ‘सेकेंडरी टैरिफ’ नाम दिया गया। यह शुल्क लगाने का कारण यह बताया गया कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है।

इस तरह, दोनों शुल्कों को मिलाकर कई भारतीय उत्पादों पर कुल 50% का भारी-भरकम शुल्क लग गया। राष्ट्रपति ट्रंप का कहना था कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने से मॉस्को को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए पैसा मिल रहा है, इसलिए यह कदम उठाना जरूरी था।

पहले भी जताई गई चिंता

कई सांसदों ने पहले भी ट्रंप को पत्र लिखकर कहा था कि टैरिफ से भारत के साथ संबंध बिगड़ रहे हैं और भारत, चीन-रूस के साथ नजदीकी बढ़ा सकता है, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने इस टैरिफ को ‘बिना सोचे-समझे की गई गलती’ बताया था और तुरंत बातचीत शुरू करने की अपील की थी।