इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार (17 दिसंबर 2025) को एक अहम फैसले में उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया कि वह लिव-इन में रह रहे 12 कपल्स को उचित सुरक्षा प्रदान करे। इन कपल्स ने कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उनके परिवार के लोग कपल्स के साथ रहने के फैसले से नाराज हैं और उन्हें जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। इस कारण वो असुरक्षित महसूस कर रहे थे।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा कि बिना शादी के साथ रहना कोई अपराध नहीं है। यदि दो बालिग आपसी सहमति से साथ रहना चाहते हैं, तो उनके निजी जीवन में हस्तक्षेप करने का किसी को अधिकार नहीं है, चाहे वह परिवार हो या समाज।
कोर्ट ने कहा, “लिव-इन रिलेशनशिप का कॉन्सेप्ट शायद सभी को मंजूर न हो लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि ऐसा रिश्ता गैर-कानूनी है या शादी की पवित्रता के बिना साथ रहना कोई अपराध है।”
कोर्ट ने अपने आदेश में घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 का हवाला देते हुए कहा कि यह कानून केवल पत्नियों तक सीमित नहीं है बल्कि घरेलू संबंध में रहने वाली महिलाओं को भी सुरक्षा देता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाएँ भी कानून के दायरे में सुरक्षित हैं।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि गरिमा और सुरक्षा जैसे मौलिक अधिकार वैवाहिक स्थिति पर निर्भर नहीं करते। राज्य का दायित्व है कि वह सभी नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करे। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता कपल्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

