बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तसलीमा नसरीन ने शनिवार (20 दिसंबर 2025) को दावा किया कि बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की नृशंस भीड़ हत्या एक साजिश का नतीजा थी।
उनके अनुसार, दीपू पर उसके ही एक मुस्लिम सहकर्मी ने फैक्ट्री में झूठा आरोप लगाया कि उसने पैगंबर के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि वह दीपू को किसी मामूली बात के लिए सजा देना चाहता था।
नसरीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए बताया कि दीपू भालुका क्षेत्र की एक फैक्ट्री में काम करता था और बेहद गरीब मजदूर था। उन्होंने कहा कि एक मामूली विवाद के बाद लोगों ने भीड़ के बीच उस पर ईशनिंदा का आरोप लगा दिया, जो हिंसा भड़काने के लिए काफी था। आरोप लगते ही उग्र भीड़ ने दीपू पर हमला कर दिया।
तसलीमा नसरीन ने क्या कहा
तसलीमा नसरीन के मुताबिक, भीड़ ने दीपू को बुरी तरह पीटा लेकिन बाद में पुलिस ने उसे बचाकर हिरासत में ले लिया, यानी वह पुलिस संरक्षण में था। उन्होंने कहा कि दीपू ने पुलिस को साफ बताया था कि उसने पैगंबर के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की और पूरा मामला सहकर्मी की साजिश है। इसके बावजूद पुलिस ने उस सहकर्मी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
नसरीन ने आरोप लगाया कि बाद में या तो पुलिस की लापरवाही से या कट्टरपंथियों के दबाव में दीपू को फिर से भीड़ के हवाले कर दिया गया, जहाँ उसे पीटा गया, फाँसी दी गई और जला दिया गया। उन्होंने इसे कट्टरपंथी उन्माद का उत्सव बताया।
लेखिका ने यह भी बात भी कही की दीपू अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला था। उसकी आय से उसके दिव्यांग पिता, माँ, पत्नी और बच्चे का गुजारा चलता था। तसलीमा नसरीन ने सवाल उठाया कि अब उसके परिवार का भविष्य क्या होगा और इस हत्या की जवाबदेही कौन लेगा।

