साल 2025 देश की सुरक्षा एजेंसियों, खासकर NIA के लिए बड़ी कामयाबियों वाला रहा। इस साल NIA ने न केवल अदालतों में अपराधियों को 92% से ज्यादा मामलों में सजा दिलवाई, बल्कि सरहद पार बैठे आतंकियों के आकाओं तक भी पहुँच बनाई। 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाना और लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई को पकड़ना एजेंसी की सबसे बड़ी जीत रही। दिल्ली धमाकों से लेकर पहलगाम हमले तक, NIA ने तेजी से कार्रवाई करते हुए गुनहगारों को सलाखों के पीछे पहुँचाया।
मुंबई हमले के मास्टरमाइंड पर बड़ा प्रहार
NIA की इस साल की सबसे बड़ी उपलब्धि तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण रही। अप्रैल में उसे अमेरिका से भारत लाया गया। तहव्वुर राणा 26/11 मुंबई हमलों की साजिश रचने वाला मुख्य चेहरा था। उसे भारत लाना उन 166 परिवारों के लिए इंसाफ की बड़ी उम्मीद है जिन्होंने उस आतंकी हमले में अपनों को खोया था।
NIA SUCCESSFULLY WORKS OUT PAHALGAM & DELHI TERROR ATTACK PROBES / NOTCHES MANY MILESTONE SUCCESSES, INCLUDING 26/11 MUMBAI ATTACKS PLOTTER TAHAWWUR RANA’S EXTRADITION, IN 2025. pic.twitter.com/ddZjKEPGZz
— NIA India (@NIA_India) December 31, 2025
टेक्नोलॉजी और डेटाबेस से बदली जाँच की रफ्तार
बदलते समय के साथ NIA ने खुद को पूरी तरह हाईटेक और आधुनिक बना लिया है। अब अपराधियों और आतंकियों पर लगाम कसने के लिए एजेंसी ने दो खास डिजिटल सिस्टम (डेटाबेस) तैयार किए हैं। पहला सिस्टम चोरी हुए या लूटे गए सरकारी हथियारों पर नजर रखने के लिए है, जिससे तुरंत पता चल सके कि कौन सा हथियार कहाँ है।
दूसरा सिस्टम अपराधियों के नेटवर्क को ट्रैक करने के लिए बनाया गया है, ताकि राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियाँ आपस में तालमेल बिठाकर अपराधियों की जानकारी तुरंत साझा कर सकें। इसके अलावा, आजकल डिजिटल दुनिया में ‘क्रिप्टोकरेंसी’ के जरिए जो टेरर फंडिंग और हेराफेरी हो रही है, उसे पकड़ने के लिए अफसरों को खास ट्रेनिंग भी दी गई है।
पहलगाम और दिल्ली हमलों का किया पर्दाफाश
NIA ने इस साल बड़े आतंकी हमलों की गुत्थी सुलझाने में भी बड़ी कामयाबी हासिल की है। अप्रैल में पहलगाम में जो हमला हुआ था, उसकी जाँच पूरी कर ली गई है। इसमें शामिल आतंकी संगठन ‘लश्कर-ए-तैयबा’ और ‘TRF’ के खिलाफ कोर्ट में कागजी कार्रवाई (चार्जशीट) पूरी हो चुकी है। एजेंसी ने उन सभी आतंकियों को बेनकाब कर दिया है, जिन्होंने धर्म के नाम पर बेगुनाह लोगों की जान ली थी।
वहीं, दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी कार धमाके के मामले में भी पुलिस ने जबरदस्त फुर्ती दिखाई। NIA की टीम ने इतनी तेजी से काम किया कि हमले के सिर्फ दो महीने के भीतर ही 9 आरोपितों को ढूँढ निकाला और उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया।
गैंगस्टर्स और खालिस्तानी नेटवर्क पर शिकंजा
NIA ने इस साल सिर्फ बड़े आतंकियों पर ही नहीं, बल्कि जेल में बैठे गैंगस्टरों और उनके आतंकी कनेक्शनों पर भी जमकर चोट की है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण लॉरेंस बिश्नोई का भाई अनमोल बिश्नोई है, जिसे एजेंसी ने बड़ी मशक्कत के बाद विदेश से भारत वापस लाया (डिपोर्ट कराया)।
सिर्फ इतना ही नहीं, भगोड़े खालिस्तानी आतंकी गोल्डी बरार जैसे अपराधियों के ठिकानों पर भी देशभर में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई ताकि उनके नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके। आँकड़ों की बात करें तो इस साल एजेंसी ने कुल 55 नए केस दर्ज किए और 276 अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल पहुँचाया, जो यह दिखाता है कि एजेंसी अब किसी भी गुनहगार को छोड़ने के मूड में नहीं है।
नक्सलवाद और मानव तस्करी पर कड़ा एक्शन
भारत सरकार ने फैसला किया है कि मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए NIA ने CRPF और अलग-अलग राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर जंगलों और नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़े अभियान चलाए हैं।
साथ ही, एजेंसी ने उन धोखेबाज गिरोहों पर भी कड़ा एक्शन लिया है जो मासूम युवाओं को ‘डंकी रूट’ जैसे खतरनाक और गैरकानूनी रास्तों से विदेश भेजने का लालच देते हैं। NIA ने इंसानियत के दुश्मन इन मानव तस्करों के जाल को तोड़कर कई शातिर अपराधियों को जेल की काल कोठरी में पहुँचा दिया है।
अब बचने का कोई रास्ता नहीं
NIA की इस साल की रिपोर्ट कार्ड साफ बताती है कि अब भारत के खिलाफ साजिश रचने वालों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है। चाहे अपराधी सात समंदर पार अमेरिका में छिपा हो या फिर क्रिप्टोकरेंसी के पीछे अपनी पहचान छुपा रहा हो, एजेंसी की तकनीक और पहुँच उसे ढूँढ निकाल रही है। 92% कनविक्शन रेट (सजा की दर) यह साबित करती है कि NIA न केवल अपराधियों को पकड़ती है, बल्कि उनके खिलाफ इतने पुख्ता सबूत जुटाती है कि वे कानून के शिकंजे से बच न सकें।

