चीन ने कहा- ‘मादुरो को तुरंत रिहा करो’, रूस बोला- ‘UN चार्टर का उल्लंघन’: वेनेजुएला पर अमेरिकी आक्रमण के खिलाफ बँटी दुनिया, जानें कौन-कौन ट्रंप के विरोध में खड़ा

वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद दुनियाभर में हलचल है। अमेरिका ने काराकास में सिलसिलेवार धमाके किए और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया है। इस कार्रवाई को लेकर कई देशों ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की है। वहीं, ट्रंप ने इसे बड़ी सफलता करार दिया। उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी सेना की दक्षता और रणनीति का अनोखा प्रदर्शन है।

इस घटना पर अलग-अलग देशों की क्या रही प्रतिक्रिया

अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई को कई देशों ने संप्रभु राष्ट्र पर हमला और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। चीन ने सबसे कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका से मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करने की माँग की है। चीनी विदेश मंत्रालय ने रविवार (4 जनवरी 2025) को जारी बयान में कहा कि किसी देश के राष्ट्रपति को इस तरह जबरन उसके देश से बाहर ले जाना पूरी तरह गलत है।

चीन ने कहा कि इस मुद्दे का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि बातचीत के जरिए होना चाहिए। अमेरिका के भीतर से भी इस कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने मादुरो की गिरफ्तारी पर नाराजगी जताते हुए इसे ‘एक्ट ऑफ वॉर’ बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कानून बल्कि अमेरिकी कानून का भी उल्लंघन है।

रूस ने अमेरिका की कार्रवाई को वेनेजुएला के खिलाफ सशस्त्र आक्रमण करार दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन किया है। रूस ने साफ तौर पर कहा कि वेनेजुएला को बिना किसी बाहरी और विनाशकारी सैन्य हस्तक्षेप के अपना भविष्य तय करने का पूरा अधिकार है। रूस ने मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया है।

ईरान ने भी अमेरिका के खिलाफ कड़ा बयान जारी किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का खुला उल्लंघन है। ईरान ने इसे वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरनाक मिसाल बताते हुए कहा कि किसी भी देश पर इस तरह सैन्य हमला करना पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।

लैटिन अमेरिका के बड़े देश ब्राजील ने भी अमेरिका की कार्रवाई को अस्वीकार्य बताया है। राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कहा कि यह वेनेजुएला की संप्रभुता पर सीधा हमला है और पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक खतरनाक उदाहरण बन सकता है। ब्राजील ने संयुक्त राष्ट्र से इस मामले में सख्त भूमिका निभाने की माँग की है और साथ ही मध्यस्थता की पेशकश भी की है।

कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने कहा कि किसी भी सशस्त्र टकराव से ऊपर शांति, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और मानवीय गरिमा की रक्षा होनी चाहिए। उन्होंने वेनेजुएला सीमा पर सैन्य बलों की तैनाती की घोषणा की है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

क्यूबा ने अमेरिका की कार्रवाई को वेनेजुएला के खिलाफ आपराधिक हमला बताया है। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनल ने कहा कि इस घटना पर तत्काल वैश्विक प्रतिक्रिया होनी चाहिए। क्यूबा ने आधिकारिक तौर पर वेनेजुएला के साथ एकजुटता जताते हुए अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की निंदा की है।

यूरोप में भी इस मुद्दे पर असहमति दिखी है। स्पेन ने मादुरो सरकार को मान्यता न देने के बावजूद अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध किया है। स्पेन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर किया गया कोई भी हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। स्पेन ने तनाव कम करने और बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालने की पेशकश की है।

हालाँकि, इटली ने इस मामले में अपेक्षाकृत अलग रुख अपनाया है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिका की कार्रवाई को सुरक्षा के लिहाज से वैध बताया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बाहरी सैन्य ताकत के जरिए किसी देश में सरकार बदलना सही तरीका नहीं है। कुल मिलाकर, वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी और अमेरिका द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई ने दुनिया को दो धड़ों में बाँट दिया है।