ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में 19 की मौत, खामेनेई ने ‘विदेशी साजिश’ का लगाया आरोप: ट्रंप ने कहा- अगर और लोग मरे तो हम चुप नहीं बैठेंगे

ईरान में जारी सरकार विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ता जा रहा है और पिछले एक हफ्ते में इन प्रदर्शनों में कम-से-कम 19 लोगों की मौत हो चुकी है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे ‘विदेशी हस्तक्षेप’ का आरोप लगाया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों की और हत्याएँ हुईं तो अमेरिका ‘बहुत सख्त जवाब’ देगा।

एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान, क्यूबा, वेनेजुएला, रूस से भारत के तेल आयात और ग्रीनलैंड जैसे विवादित मुद्दों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान की स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है और यदि वहाँ पहले की तरह लोगों को मारा गया तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।

ट्रंप की धमकी और ईरान की तीखी प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा, “अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, जैसा उन्होंने पहले किया है, तो अमेरिका उन्हें बहुत जोरदार तरीके से जवाब देगा।” इससे पहले 2 जनवरी 2026 को ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ‘लॉक्ड एंड लोडेड’ है और कार्रवाई के लिए तैयार है।

ट्रंप के इस बयान पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। सर्वोच्च नेता खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली लारीजानी ने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश की तो इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है।

आर्थिक संकट, जनआक्रोश और सत्ता की चिंता

ईरान में ये विरोध प्रदर्शन गहरे आर्थिक संकट के बीच भड़के हैं। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गई, जहाँ एक अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 14.5 लाख रियाल हो गई। साल की शुरुआत से अब तक रियाल अपनी लगभग आधी कीमत खो चुका है।

इसके बाद महँगाई ने भी रिकॉर्ड तोड़ दिया, खाद्य पदार्थों की कीमतें 72% और चिकित्सा सामान की कीमतें 50% तक बढ़ गईं। हालात तब और बिगड़ गए जब सरकार ने 2026 के बजट में 62 प्रतिशत कर वृद्धि का प्रस्ताव रखा। इनके बीच 28 दिसंबर से प्रदर्शन होने शुरू हुए और लोगों ने अपनी दुकानें बंद कर सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया।

देखते ही देखते यह आंदोलन अहवाज, हमदान, क़ेश्म और मशहद जैसे शहरों तक फैल गया। सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में प्रदर्शनकारियों को ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाते हुए भी देखा गया है। ये प्रदर्शन 2022-23 के उस बड़े आंदोलन के बाद सबसे अहम माने जा रहे हैं, जो महसा अमीनी की हिरासत में मौत के बाद भड़का था।