दुनियाभर में व्यापार को लेकर मची उथल-पुथल और अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैक्स (Tariff) के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। सरकार के ताजा आँकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है। खास बात यह है कि ट्रंप सरकार के टैक्स बढ़ाने के बावजूद भारत का एक्सपोर्ट (निर्यात) घटा नहीं, बल्कि नवंबर में तीन साल के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया है।
GDP ग्रोथ: RBI के अनुमान से भी आगे निकलेगा भारत
सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा 7 जनवरी 2025 को जारी आँकड़ों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी हुई है। सरकार का 7.4% ग्रोथ का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 7.3% के अनुमान से भी थोड़ा बेहतर है।
हालाँकि, यह साल 2024 के 9.2% के मुकाबले कम है, लेकिन पिछले साल (7.3%) की तुलना में इसमें सुधार दिख रहा है। सरकार जल्द ही GDP मापने के पुराने तरीके में भी बदलाव कर सकती है, जिसकी झलक 2026 के बजट में मिल सकती है।
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— ET NOW (@ETNOWlive) January 7, 2026
आम जनता का खर्च और खेती-बाड़ी का हाल
देश की अर्थव्यवस्था में करीब 60% हिस्सा आम जनता के खर्च का होता है, जिसमें इस साल 7% की बढ़त की उम्मीद है। वहीं, सरकारी खर्च में 5.2% की भारी बढ़ोतरी का अनुमान है, जो पिछले साल सिर्फ 2.3% था।
खेती-बाड़ी के क्षेत्र में 3.1% की स्थिर ग्रोथ रहने की उम्मीद है, जो देश की करीब 40% आबादी को रोजगार देती है। इसके अलावा कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी 7% की रफ्तार से काम होने का अनुमान है।
एक्सपोर्ट ने चौंकाया: अमेरिका और चीन में बढ़ी भारतीय सामान की माँग
सबसे हैरान करने वाली बात भारत के एक्सपोर्ट में दिखी है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 50% तक टैक्स बढ़ा दिया है, फिर भी नवंबर 2025 में हमारा एक्सपोर्ट 20% बढ़कर 38 अरब डॉलर के पार पहुँच गया।
अकेले अमेरिका को होने वाले निर्यात में 22% की बढ़ोतरी हुई है। वहीं चीन को किए जाने वाले एक्सपोर्ट में 90% का भारी उछाल आया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयाँ और इंजीनियरिंग सामान की विदेशों में जबरदस्त माँग रही है।
व्यापार घाटा हुआ कम और आगे की राह
भारत के लिए राहत की बात यह भी है कि नवंबर में आयात में 2% की कमी आई है, क्योंकि सोना, तेल और कोयले की खरीद कम हुई। इससे देश का व्यापार घाटा (Trade Deficit) घटकर 24.5 अरब डॉलर रह गया है, जो पिछले 6 महीनों में सबसे कम है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपए की कमजोरी और नए देशों (जैसे यूके और ओमान) के साथ व्यापारिक समझौतों से भारत को ग्लोबल मार्केट में टिके रहने में मदद मिल रही है।

