महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा हड़कंप मच गया है। पूर्व पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला की एक गोपनीय रिपोर्ट में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021 में सरकार के इशारे पर तत्कालीन डीजीपी संजय पांडे ने तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस और मौजूदा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ULC घोटाले में झूठे आरोपों के तहत फँसाने की कोशिश की थी। यह रिपोर्ट गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी गई है।
मामला ठाणे नगर पुलिस थाने में 2016 में दर्ज एक पुराने ULC केस से जुड़ा है। यह बिल्डर संजय पुनामिया और श्यामसुंदर अग्रवाल के साझेदारी विवाद का था, जिसमें 2017 में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी थी। इसके बावजूद संजय पांडे ने मामले की दोबारा जाँच के आदेश दिए, जिसे SIT ने राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित माना।
रिपोर्ट में दावा है कि संजय पांडे ने ठाणे के डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल को निर्देश दिए थे कि फडणवीस और शिंदे को आरोपित बनाया जाए। उन्हें यह दिखाना था कि दोनों नेताओं ने बिल्डरों से अवैध वसूली की है। अधिकारियों पर गिरफ्तारी का भी दबाव डाला गया। उस समय महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी सरकार थी, जिसमें शरद पवार की एनसीपी और कॉन्ग्रेस शामिल थी।
आरोपित संजय पुनामिया ने जाँच एजेंसियों को एक ऑडियो क्लिप सौंपी, जिसमें कथित तौर पर संजय पांडे, लक्ष्मीकांत पाटिल और सरदार पाटिल की फडणवीस को फँसाने वाली बातचीत है। कलिना फॉरेंसिक लैब की जाँच में इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि हुई है।
कोपरी पुलिस स्टेशन के CR No. 176/2021 केस में डीसीपी पाटिल ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पूछताछ की। पुनामिया और सुनील जैन पर दबाव डाला गया कि वे फडणवीस द्वारा वसूली की बात कबूल करें।
SIT को मई 2021 में एसीपी सरदार पाटिल की सरकारी गाड़ी की लॉगबुक के पन्ने गायब मिले, जिसे सबूत मिटाने की कोशिश माना गया। बातचीत में फडणवीस-शिंदे की गिरफ्तारी न होने पर सवाल भी उठे।
रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया है कि यह पूरा घटनाक्रम पुलिस तंत्र के राजनीतिक दुरुपयोग और प्रतिशोध की ओर इशारा करता है। ULC घोटाला शहरी भूमि सीलिंग कानून 1976 से जुड़ा है, जिसमें फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों की जमीन बचाई गई, जिसे बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा घोटाला करार दिया है।

