TMC का कामकाज देखने वाली I-PAC का पकड़ा गया ‘फ्रॉड’: जिस कंपनी से लोन के नाम पर लिए ₹13.5 करोड़, वो कंपनी हकीकत में है ही नहीं

I-PAC को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। कंपनी ने दावा किया था कि उसे रोहतक की कंपनी से ₹13 करोड़ से ज़्यादा का ‘अनसिक्योर्ड लोन’ मिला है। लेकिन कंपनी का नाम ऑफिशियल रिकॉर्ड में नहीं है यानी कंपनी का अस्तित्व ही नहीं है। इस खुलासे से I-PAC की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) को 2021 में रोहतक की फर्म ‘रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया (P) लिमिटेड’ से 13.50 करोड़ रुपये का ‘अनसिक्योर्ड लोन’ मिला। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहतक की इस फर्म का कोई ऑफिशियल रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

इसी तरह के नाम और उसी पते पर एक फर्म, ‘रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्र इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ थी। हालाँकि अगस्त 2018 में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) के रिकॉर्ड से उसका नाम हटा दिया गया था। यह फर्म 2013 में बनी थी। इसका मतलब है कि इस फर्म का नाम घोषित लोन लेने से तीन साल पहले ऑफिशियल रिकॉर्ड से हटा दिया गया था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 27 जून 2025 को I-PAC ने दावा किया कि उसने 2024-25 में 13.50 करोड़ रुपये के लोन में से 1 करोड़ रुपये ‘चुका’ दिए हैं और 12.50 करोड़ रुपये अभी बकाया है।

8 जनवरी 2026 को ED की टीमों ने 10 जगहों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था, जिनमें से 6 पश्चिम बंगाल में और चार दिल्ली में थीं। इनमें कोलकाता स्थित कंपनी की ऑफिस, कंपनी के मालिक प्रतीक जैन के घर के अलावा हवाला ऑपरेटरों, शाकंभरी ग्रुप के खरीदारों और I-PAC से जुड़ी जगहों पर छापेमारी हुई थी।

ED को I-PAC और कोल माइनिंग स्कैम के बीच लिंक मिले। ED की रेड के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी I-PAC ऑफिस पहुँची थी और एक हरे रंग की फाइल लेकर उन्हें निकलते हुए देखा गया था। यहाँ तक कि अन्य फाइलों को बंगाल पुलिस की वैन में रखा गया। इस पर देश भर में नई बहस शुरू हो गयी थी कि मुख्यमंत्री इन तरह से केन्द्रीय एजेंसियों के काम में दखलदांजी कैसे कर सकती हैं।

I-PAC TMC की चुनावी स्ट्रैटेजी संभालती है। ED ने CBI जाँच की माँग करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया। सवाल उठाए गए कि TMC खासकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, एक प्राइवेट पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म की जाँच से इतनी परेशान क्यों हैं।