प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 में शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को बसंत पंचमी के मौके पर आस्था का जबरदस्त सैलाब देखने को मिला है। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे को पीछे छोड़ते हुए दोपहर 12 बजे तक ही लगभग 2 करोड़ 10 लाख श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं।
सुबह ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुआ स्नान का यह सिलसिला लगातार जारी है और माना जा रहा है कि आज शाम तक यह आँकड़ा 3 करोड़ के पार जा सकता है। अगले चार दिनों में संगम तट पर साढ़े तीन करोड़ भक्तों के पहुँचने की उम्मीद है।
ठिठुरती ठंड पर भारी पड़ी आस्था
शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को प्रयागराज में पारा 14 डिग्री के आसपास है, लेकिन भक्तों के उत्साह के सामने सर्दी फीकी पड़ गई। ‘गजकेसरी योग’ के खास संयोग में लोग सुबह 3 बजे से ही त्रिवेणी घाट पर जुटने लगे थे। क्या बच्चे, क्या बूढ़े- हर कोई ‘हर-हर गंगे’ के जयकारों के साथ आस्था की डुबकी लगा रहा है। अयोध्या के सरयू घाट और काशी के गंगा घाटों पर भी श्रद्धालुओं का ऐसा ही तांता लगा हुआ है।
क्यों है आज का स्नान इतना खास?
बसंत पंचमी को ऋतुओं का राजा कहा जाता है और आज ही के दिन विद्या की देवी माँ सरस्वती प्रकट हुई थीं। ज्योतिषियों की मानें तो आज पूरे दिन पुण्यकाल है, इसलिए जो लोग सुबह स्नान नहीं कर पाए, वे दिन भर कभी भी डुबकी लगाकर पुण्य कमा सकते हैं। प्रकृति के इस बदलाव और नई ऊर्जा के संचार के बीच संगम स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
सुरक्षा ऐसी कि परिंदा भी पर न मार सके
इतनी भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पूरे मेला क्षेत्र को ‘नो-व्हीकल जोन’ बना दिया है, यानी अब सिर्फ पैदल ही घाटों तक जाया जा सकता है। सुरक्षा के लिए यूपी ATS के कमांडो, आरएएफ और खुफिया एजेंसियाँ तैनात हैं।
साढ़े तीन किलोमीटर लंबे 24 स्नान घाटों पर एआई (AI) कैमरों और ड्रोन से चप्पे-चप्पे की निगरानी हो रही है। वीआईपी कल्चर को पूरी तरह बंद कर दिया गया है ताकि आम आदमी को स्नान में कोई दिक्कत न आए।
घाटों पर गोताखोर और डॉक्टरों की टीम मुस्तैद
मेला प्रशासन ने सुरक्षा के साथ-साथ सेहत का भी ख्याल रखा है। संगम तट पर जल पुलिस, एनडीआरएफ (NDRF) और गोताखोरों की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। कड़ाके की ठंड की वजह से घाटों के पास ही मेडिकल कैंप लगाए गए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने पर उसे तुरंत इलाज मिल सके।

