दिल्ली की एक कोर्ट ने 2020 के हिंदू विरोधी दंगो के कथित ‘लार्जर कॉन्सपिरेसी’ केस में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र जज समीर बजपाई ने कहा कि हुसैन को इससे पहले भी 2024 में राहत नहीं दी गई थी और उस समय कोर्ट ने आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 5 आरोपितों मोहम्मद सलीम खान, गुलफिशा फातिमा, शादाब अहमद, शिफा-उर-रहमान और मीरान हैदर को जमानत दी थी, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को ‘मुख्य साजिशकर्ता’ मानते हुए राहत नहीं दी गई थी।
जज ने कहा कि जब कोर्ट पहले ही यह राय बना चुकी है कि आवेदक के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है, तो अब पहले के आदेश की समीक्षा कर अलग राय नहीं बनाई जा सकती। कोर्ट ने सह-आरोपित अथर खान और सलीम मलिक की जमानत भी खारिज कर दी।
इस मामले में कई छात्र कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता आरोपित हैं, जिन पर 2019-20 के एंटी-सीएए प्रदर्शनों के दौरान दंगों की साजिश रचने का आरोप है। आरोपितों पर UAPA और IPC के तहत मुकदमा चल रहा है।

