खादी-रेशम से गाँव में बनेगा रोजगार, बजट 2026 में कपड़ा उद्योग और हैंडलूम पर फोकस: महात्मा गाँधी ग्राम स्वराज के साथ राष्ट्रीय फाइबर योजना का ऐलान

संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का आम बजट पेश किया। बजट भाषण के दौरान सरकार ने गाँवों और डिजिटल कनेक्टिविटी पर खास फोकस दिखाया। इसी क्रम में वित्त मंत्री ने ‘महात्मा गाँधी ग्राम स्वराज योजना’ और ‘राष्ट्रीय फाइबर योजना’ का ऐलान किया। सरकार का कहना है कि इन दोनों योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर कपड़ा उद्योग और हैंडलूम को पहचान देना है।

महात्मा गाँधी ग्राम स्वराज योजना का उद्देश्य गाँवों में खादी और हैंडलूम से जुड़े काम को फिर से मजबूत करना है। बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पहल की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार खादी और हाथ से बने कपड़ों के क्षेत्र को नई दिशा देना चाहती है।

इस योजना के तहत गाँवों में काम करने वाले बुनकरों, कारीगरों और छोटे उत्पादकों को बेहतर सुविधाएँ दी जाएँगी, ताकि वे अपना उत्पादन बढ़ा सकें और अपने उत्पादों की गुणवत्ता सुधार सकें। सरकार डिजाइन, तकनीक और मार्केटिंग पर भी ध्यान देगी, जिससे खादी और हैंडलूम के उत्पाद ज्यादा लोगों तक पहुँच सकें।

इस योजना के जरिए सरकार गाँवों में ही रोजगार के अवसर बढ़ाने और लोगों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रही है। खादी और हैंडलूम को मजबूत करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिलेगा और पलायन कम होगा। साथ ही स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिलने से भारत की पारंपरिक विरासत और हस्तशिल्प को नई पहचान मिलेगी।

वहीं आम बजट में सरकार ने कपड़ा उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना को भी सामने रखा है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि सरकार टेक्सटाइल सेक्टर (कपड़ा उद्योग) को भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार की एक बड़ी ताकत के तौर पर विकसित करना चाहती है, इसीलिए प्राकृतिक फाइबर और नई तकनीकी फाइबर दोनों पर काम होगा।

राष्ट्रीय फाइबर योजना का लक्ष्य है कि भारत रेशमी, जूट और अन्य प्राकृतिक रेशों के उत्पादन को बढ़ाए, ताकि किसान और कारीगर दोनों को सीधा फायदा मिले और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ें। इसके लिए तकनीकी, मशीनरी, स्किलिंग और गुणवत्ता मानकों को भी सुधारने की योजना बना रही है ताकि भारत के उत्पाद घरेलू और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बन सकें।

बजट में यह भी बताया गया है कि टेक्सटाइल विस्तार और रोजगार योजना के जरिए पारंपरिक टेक्सटाइल क्लस्टर्स (जैसे किए हल्दी, कपास, रेशम उद्योग वाले क्षेत्र) को मॉडर्न मशीनरी और टेक्नोलॉजी के साथ नया आकार दिया जाएगा। यह देश को मल्टी-लेवल टेक्सटाइल उद्योग के रूप में विकसित करने की यह कोशिश है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके और भारत के कपड़ा निर्यात को भी बढ़ावा मिले।