मलेशिया पुलिस ने कुआलालंपुर में शनिवार (7 फरवरी 2026) को इस्लामी कट्टरपंथी जमरी विनोद को गिरफ्तार कर लिया। जमरी शहर के बीचों-बीच सोगो डिपार्टमेंट स्टोर के बाहर ‘मंदिरों के विरोध’ में एक रैली करने वाला था। हालाँकि, यह रैली नहीं हुई और कट्टरपंथी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से इस प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी थी।
कुआलालंपुर के पुलिस प्रमुख दातुक फदिल मार्सुस ने फेसबुक पोस्ट के जरिए गिरफ्तारी की पुष्टि की। उन्होंने कहा, “इस कार्रवाई में जमरी विनोद और कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है।” मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरान कई अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया। इनमें वकील हनीफ खातरी अब्दुल्ला, बरसातु पार्टी के हुलु लंगाट डिवीजन के सूचना प्रमुख शफीक अब्दुल हलीम, उम्मा NGO से हिशामुद्दीन अबू बकर, बरसातु के इस्कंदर खू, PPIM से गुलाब जान और वेबसाइट मालिक तमीम दाहारी अब्द रजाक शामिल हैं।
इस इलाके में हंगामा ना हो इसलिए करीब 200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया, जिनमें लाइट स्ट्राइक फोर्स के जवान भी शामिल थे। इससे पहले दिन में मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने लोगों से देश में अशांति न फैलाने की अपील की थी। उन्होंने कहा, “अगर कोई कानून तोड़ता है और नस्लीय तनाव फैलाने की कोशिश करता है, तो उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया जाए।”
जमरी की गिरफ्तारी के बाद जेलुतोंग से सांसद आरएसएन रायर ने पुलिस से सख्त कार्रवाई की माँग की। उन्होंने अपील की कि जमरी को जमानत पर रिहा न किया जाए बल्कि रिमांड पर रखकर कोर्ट में आरोप तय किए जाएँ। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
पीएम मोदी की यात्रा से जुड़ा था रैली का खतरा
यह प्रस्तावित रैली ऐसे समय में रखी गई थी, जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 और 8 फरवरी को मलेशिया के दो दिवसीय दौरे पर थे। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करना था, खासकर पिछले साल रिश्तों को ‘समग्र रणनीतिक साझेदारी’ में अपग्रेड किए जाने के बाद।
पीएम मोदी के दौरे से पहले जमरी ने फेसबुक पर घोषणा की थी कि वह ‘अवैध’ हिंदू मंदिरों के खिलाफ एक रैली आयोजित करेगा। उसने समर्थकों से सोगो के बाहर इकट्ठा होने की अपील की थी और कहा था कि वे ‘घुसपैठियों’ के खिलाफ लड़ेंगे। उसके इस बयान को मलेशिया के हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने के तौर पर देखा गया।
जमरी पहले विनोद कालीमुथु के नाम से जाना जाता था। वह तमिल मूल का मलेशियाई नागरिक है। उसने इस्लाम अपनाने के बाद हिंदू धर्म को लेकर कई भड़काऊ बयान दिए हैं। वह भारत के भगोड़े इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक का समर्थक भी है, जिसे मलेशिया सरकार ने शरण दे रखी है।

