दशकों से लुटियंस दिल्ली के सबसे प्रीमियम इलाके में 27.3 एकड़ की कीमती सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए बैठा दिल्ली जिमखाना क्लब मामले में अब नया मोड़ आया है। इस केस में अब करीबन 50 पूर्व सैनिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की है। वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों की यूनियन अपने भविष्य और नौकरियों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की माँग कर रही है।
पत्र में पूर्व सैनिकों ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि वे आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) को इस फैसले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दें। उन्होंने सरकार से ऐसा विकल्प तलाशने को कहा है जिससे जनहित की रक्षा भी हो और देश की सेवा करने वालों का कल्याण भी प्रभावित न हो।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि वे जनहित या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकारी जमीन वापस लेने के सरकार के अधिकार का सम्मान करते हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि इस क्लब के बंद होने से हजारों पूर्व सैनिकों और सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों के जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।
STORY | 50 military veterans write to PM, seek his intervention to save Delhi Gymkhana Club
— Press Trust of India (@PTI_News) August 11, 2026
A group of 50 retired military officers, who are members of the Delhi Gymkhana Club that is facing eviction from its premises, have written to Prime Minister Narendra Modi seeking his… pic.twitter.com/jTIU6gGMDS
उन्होंने दिल्ली जिमखाना क्लब को एक ऐतिहासिक संस्था बताया, जिसने सालों से सैनिकों, प्रशासनिक अधिकारियों, कूटनीतिज्ञों, जजों, विद्वानों और खिलाड़ियों को एक साथ जोड़ने का काम किया है।
पूर्व सैनिकों का कहना है कि यह क्लब देश की सांस्कृतिक और संस्थागत विरासत का हिस्सा है, जो उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। पूर्व सैनिकों ने प्रधानमंत्री से अपनी बात रखने के लिए 15-20 मिनट की मुलाकात का समय मांगा है।
दूसरी ओर, ‘दिल्ली जिमखाना वर्कर्स एसोसिएशन’ ने चिंता जताई है कि अगर क्लब खाली कराया जाता है, तो वहाँ काम करने वाले लगभग 700 स्थायी और अनुबंध (कांट्रैक्ट) कर्मचारियों का क्या होगा?
कर्मचारी संघ ने क्लब के महासचिव और सचिव को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें अपनी नौकरियों के बारे में कोई स्पष्ट भरोसा नहीं मिला है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब क्लब को खाली कराने की प्रक्रिया चल रही है, तो सरकार द्वारा नियुक्त समिति के दो अधिकारियों का कार्यकाल एक साल के लिए क्यों बढ़ाया गया?
कर्मचारियों ने इससे पहले भी प्रधानमंत्री से अपनी आजीविका बचाने की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा था कि ज्यादातर कर्मचारी मध्य और निम्न-मध्यम वर्ग से आते हैं और 10 से भी ज्यादा सालों से क्लब में सेवाएँ दे रहे हैं।
क्या है मामला
केंद्र सरकार ने 22 मई को जिमखाना क्लब की जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की थी। सरकार का कहना है कि यह जमीन रक्षा बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं के लिए जरूरी है।
भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने 1928 के लीज डीड (पट्टे) के नियमों का हवाला देते हुए 2, सफदरजंग रोड स्थित इस 27.3 एकड़ संपत्ति को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है। सरकार के अनुसार, यह इलाका सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है।
सरकार ने पहले क्लब को 5 जून, 2026 तक जमीन खाली करने का निर्देश दिया था। इसके बाद L&DO ने बकाया किराए (लगभग ₹47.58 करोड़) और जमीन खाली कराने को लेकर शो-कॉज नोटिस भी जारी किया। फिलहाल यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है, जहां लीज रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई है

