लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 से 2024 के बीच पाँच वर्षों में गड्ढों के कारण कुल 9438 लोगों की मौत हुई। इनमें से अकेले उत्तर प्रदेश में 5127 मौतें दर्ज की गईं, जो कुल मौतों का लगभग 54% है।
साल 2024 में ही उत्तर प्रदेश में 1369 लोगों की जान गड्ढों की वजह से गई, जो राष्ट्रीय स्तर पर हुई कुल मौतों के आधे से भी अधिक है। इससे पहले 2023 में राज्य में 1320 और 2022 में 1030 लोगों की मौत गड्ढों से जुड़ी दुर्घटनाओं में हुई थी।

केंद्र शासित प्रदेशों में शून्य मामले
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश, बिहार, गोवा और चंडीगढ़ समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने गड्ढों से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं, घायल और मौतों के मामले में शून्य आंकड़ा रिपोर्ट किया है। इससे इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसे मामलों के रिकॉर्डिंग के तरीके पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वार्षिक स्तर पर देखें तो 2020 में गड्ढों से जुड़ी मौतों की संख्या 1555 थी, जो 2021 में घटकर 1481 हो गई। हालाँकि इसके बाद मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा 2022 में 1856, 2023 में 2161 और 2024 में 2385 मौतें दर्ज की गईं।
राज्यों में मध्य प्रदेश 2020 से 2024 के बीच 969 मौतों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जिनमें से 277 मौतें केवल 2024 में हुईं। इसके बाद तमिलनाडु में 612, ओडिशा में 425, पंजाब में 414 और असम में 395 मौतें दर्ज की गईं। केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली में इसी अवधि के दौरान 50 मौतें दर्ज हुईं।
राज्य पुलिस रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में देशभर में गड्ढों से जुड़ी 23056 सड़क दुर्घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें 19,956 लोग घायल हुए। इनमें से 9670 मामलों को ‘गंभीर चोट’ (ग्रिवियस इंजरी) की श्रेणी में रखा गया। सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े वर्ष 2025 के आंकड़े अभी तक मंत्रालय द्वारा जारी नहीं किए गए हैं।
संसद में दिए गए जवाब में मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस अवधि के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव और मरम्मत के लिए 65000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि आवंटित की गई है।

