पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बिगड़ती सेहत को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। जेल में बंद इमरान खान की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसके चलते उन्हें अस्पताल शिफ्ट करने का फैसला लिया गया है। इस बीच उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने पाकिस्तान सरकार को भी चेताया है।
कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जेल में सही इलाज न मिलने के कारण इमरान खान की आँखों की रोशनी को नुकसान पहुँचा है। रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक उनकी आँखों की रोशनी बिल्कुल सामान्य थी। इसके बाद उन्होंने अदियाला जेल प्रशासन से धुंधला दिखने और नजर कमजोर होने की शिकायत की, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिला।
सेहत को लेकर सरकार ने लिया फैसला
पाकिस्तान के संसदीय मामलों के मंत्री तारीक फजल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि इमरान खान की तबीयत को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने और एक मेडिकल कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही उन्हें अपने बेटों से फोन पर बात करने की अनुमति भी दी गई है।
عمران خان کو اپنے بیٹوں سے فون پر بات کرنے کی سہولت فراہم کی گئی ہے اور ان کی صحت کے پیش نظر انہیں ہسپتال منتقل کرنے اور میڈیکل بورڈ تشکیل دینے کا فیصلہ بھی کیا گیا ہے
— Dr. Tariq Fazal Ch. (@DrTariqFazal) February 14, 2026
حکومت انسانی ہمدردی اور قانونی تقاضوں کو مقدم رکھتی ہے۔ ہر قیدی کو قانون کے مطابق سہولیات فراہم کرنا حکومت کی…
तारीक फजल ने अपने बयान में लिखा, “इमरान खान को फोन पर अपने बेटों से बात करने की सुविधा दी गई है और उनकी सेहत को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने और एक चिकित्सा समिति गठित करने का फैसला लिया गया है।”
PTI ने सरकार को दी चेतावनी
इमरान खान की पार्टी PTI ने उनके स्वास्थ्य और कथित तौर पर चुपचाप अस्पताल शिफ्ट किए जाने की खबरों पर गंभीर चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि किसी भी तरह का मेडिकल चेकअप या इलाज उनके निजी डॉक्टरों और कम-से-कम एक परिवार के सदस्य की मौजूदगी में ही होना चाहिए।
PTI ने आरोप लगाया कि बिना परिवार या निजी चिकित्सकों को विश्वास में लिए अस्पताल शिफ्ट करने का फैसला मानवाधिकारों, संविधान और जेल नियमों का उल्लंघन है। पार्टी ने इलाज में हो रही देरी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
PTI ने चेतावनी दी है कि अगर इमरान खान के स्वास्थ्य या जीवन को कोई भी नुकसान पहुँचता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मौजूदा संघीय और प्रांतीय सरकारों की होगी।

